प्रमोद महाजन की हत्या को 20 बरस गुजर गए, क्या हुआ था उस दिन? जानें हत्याकांड की पूरी कहानी
Pramod Mahajan Death Anniversary: 3 मई 2006 को मुंबई के हिंदुजा अस्पताल में भाजपा के कद्दावर नेता ने आखिरी सांस ली थी। उनके अपने ही भाई ने उनको गोली मार दी थी। जानिए उस दिन क्या हुआ था।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
प्रमोद महाजन(फाइल फोटो), सोर्स- सोशल मीडिया
Pramod Mahajan: भाजपा के शीर्ष नेता और पूर्व सूचना और प्रसारण मंत्री प्रमोद महाजन की उनके भाई प्रवीण महाजन ने हत्या कर दी थी। हत्या के एक दिन पहले दोनों भाइयों के बीच किसी बात को लेकर बहस हुई थी। हत्या वाले दिन भी दोनों भाइयों में बहस हुई और इसके बाद प्रमोद महाजन को उनके ही भाई ने गोली मार दी।
22 अप्रैल 2006 को भाइयों में हुए झगड़े के बीच प्रवीण महाजन ने एक के बाद एक तीन गोलियां मारकर प्रमोद महाजन की जान ले ली थी। गोलियां लगने के बाद भी प्रमोद महाजन ने 13 दिनों तक जिंदगी और मौत की लंबी लड़ाई लड़ी। अंततः 3 मई को उनका देहांत हो गया।
22 अप्रैल 2006 को क्या हुआ था?
दिन था 22 अप्रैल। प्रमोद महाजन अपने घर पर थे। वर्ली के पूर्णा गोदावरी में उनका फ्लैट था। तकरीबन सुबह साढ़े सात बजे प्रमोद अपने घर में ही सोफे पर बैठे अखबार पढ़ रहे थे। अचानक किसी ने दरवाजा खटखटाया तो उनकी पत्नी रेखा ने दरवाजा खोला। सामने प्रमोद महाजन का भाई प्रवीण खड़ा था।
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बीती ही रात को दोनों भाइयों का झगड़ा भी हुआ था। बहस के बाद प्रवीण ने प्रमोद को एक लाइन लिखकर भेजी थी- ‘याचना नहीं, अब रण होगा, जीवन या मरण होगा।’ छोटा भाई होने के नाते रेखा ने उसे अंदर बुलाया और खुद चाय बनाने के लिए किचन में चली गईं। इसके बाद दोनों भाइयों में बातचीत शुरू हुई। प्रमोद ने कहा कि अगर कोई जरूरी बात हो तो असिस्टेंट से अपॉइंटमेंट लेकर मिलने आओ। 10 मिनट के अंदर ही बातचीत गरमा-गरमी में बदल गई और प्रवीण ने प्रमोद महाजन पर गोलियां चला दीं। तीन गोलियों से छलनी हुए प्रमोद वहीं गिर पड़े।
गोलियों की आवाज रेखा के कानों में गई तो वो किचन से दौड़कर मौके पर आईं। शरीर से खून बहना शुरू हो चुका था। प्रवीण वहां से भाग खड़ा हुआ। इसके बाद आनन फानन उसी अपार्टमेंट में रह रहे गोपीनाथ मुंडे को बुलाया और उनको हिंदुजा अस्पताल में एडमिट किया गया। बताया जाता है कि हिंदुजा अस्पताल में एडमिट करने का आईडिया भी प्रमोद महाजन का था। प्रमोद अभी तक होश में थे। प्रमोद के अस्पताल पहुंचने से पहले वहां सभी तैयारियां कर ली गई थीं। उनको तुरंत ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया और इलाज शुरू किया गया।
भाई को गोलियों से भून थाने पहुंचा प्रवीन
इधर भाई को गोलियों के भूनने के बाद प्रवीण सीधे ट्रैफिक पुलिस हेडक्वार्टर पहुंचा वहां जाकर सारी घटना बताई। इसके बाद उसे वर्ली थाने भेज दिया गया। जब प्रवीण वर्ली थाने पहुंचा तो उसने अधिकारियों को चिल्लाकर बताया कि उसने अपने भाई प्रमोद महाजन की हत्या कर दी है। इसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया और मुकदमा भी दर्ज किया गया।
प्रमोद हिंदुजा अस्पताल में जीवन और मौत की लड़ाई लड़ रहे थे। गोलियों ने उनके शरीर के कई अंगों को डैमेज कर दिया था। अस्पताल के बाहर उनके समर्थकों की भारी भीड़ जमा हो गई। तकरीबन 13 दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहने के बाद भी वे रीकवर नहीं कर पाए और 3 मई 2006 में उनका देहांत हो गया।
प्रवीण ने अपने ही भाई को क्यों मारा?
मामले की तहकीकात की जाने लगी। प्रवीण से सख्ती से पूछताछ की गई। मीडिया से लेकर पुलिस अधिकारियों तक का केवल एक ही सवाल था कि आखिर प्रवीण ने अपने ही भाई की जान ले ली। जांच के दौरान प्रवीण ने कई बार अपना स्टेटमेंट बदला। प्रवीण ने आरोप लगाया कि प्रमोद महाजन ने पार्टी फंड में हेरफेर किया था। उसने प्रमोद पर दूसरी महिलाओं से संबंध होने का भी आरोप लगाया।
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हत्या के कारण के बारे में पहली बार उसने बताया कि गुस्से में आकर उनके भाई की हत्या की। इसके बाद बयान बदलते हुए उसने कहा कि वो बार बार मिलने का वक्त मांग रहा था और जब प्रमोद ने अपॉइंटमेंट लेने की बात कही तो उसने गोली चला दी। प्रमोद की पत्नी रेखा ने बताया था कि प्रवीण उस दिन पैसे लेने आया था। वो बार-बार पैसों की डिमांड कर रहा था। जब प्रमोद ने पैसे देने से मना कर दिया तो प्रवीण ने उनकी जान ले ली।
