

Powai Lake Sewage Interception: मुंबई की महत्वपूर्ण पवई झील को सीवेज प्रदूषण से बचाने के लिए बीएमसी ने बड़ा कदम उठाया है। झील में प्रतिदिन पहुंचने वाले करीब 1.8 करोड़ लीटर सीवेज को रोकने के लिए 20 आउटफॉल को इंटरसेप्ट कर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की ओर मोड़ने का काम 100 प्रतिशत पूरा कर लिया गया है।
बीएमसी के अनुसार, इस परियोजना के तहत कुल 3,056 मीटर लंबी नई सीवेज पाइपलाइन बिछाई गई है। इसका उद्देश्य झील में सीधे पहुंचने वाले सीवेज के प्रवाह को रोकना है। बीएमसी के मुताबिक, अब पवई झील में सीवेज का प्रवेश पूरी तरह रोकने की व्यवस्था की गई है।
मुंबई बीएमसी ने पवई झील में सीवेज पहुंचाने वाले कुल 20 आउटफॉल पॉइंट की पहचान की थी। इनमें 18 प्रवाह आदि शंकराचार्य मार्ग पर स्थित हैं, जबकि दो आउटफॉल पेरूगेट क्षेत्र में हैं।
इनमें से 18 प्रवाहों को इंटरसेप्ट कर गुरुत्वाकर्षण प्रणाली के जरिए भांडुप सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की ओर मोड़ा गया है। वहीं, पेरूगेट के दो प्रवाहों को फिल्टरपाड़ा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की दिशा में मोड़ा गया है।
पवई में बंद पड़े सीवेज पंपिंग स्टेशन की जगह 8 मिलियन लीटर प्रतिदिन यानी 8 MLD क्षमता वाले आधुनिक और स्वचालित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण भी किया जा रहा है। संयंत्र शुरू होने के बाद उपचारित पानी को दोबारा झील में छोड़े जाने की योजना है।
इस परियोजना को पूरा करने की निर्धारित समय सीमा दिसंबर 2028 है। हालांकि, बीएमसी इसे मई 2027 तक पूरा करने का प्रयास कर रही है। परियोजना पूरी होने के बाद झील में सीवेज प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
पवई झील की सफाई के लिए दो हार्वेस्टर मशीनों की मदद से अब तक 20,340 मीट्रिक टन यानी करीब 85 प्रतिशत जलकुंभी हटाई जा चुकी है। बीएमसी अधिकारियों के अनुसार, सीवेज का प्रवाह रुकने से झील में जलकुंभी की बढ़ने की गति में भी कमी आने की उम्मीद है।
अतिरिक्त मनपा आयुक्त (परियोजना) अभिजीत बांगर के अनुसार, सीवेज इंटरसेप्शन का काम पूरा होने से पवई झील के जलप्रदूषण को नियंत्रित करने और उसके पर्यावरणीय स्वास्थ्य में सुधार लाने में मदद मिल सकती है।