पवनराजे हत्याकांड पर कोर्ट के फैसले के बाद दिल्ली में हलचल, अमित शाह के दखल से सफल होगा ऑपरेशन टाइगर?
Pawanraje Nimbalkar Case: पवनराजे निंबालकर हत्याकांड में सीबीआई कोर्ट के फैसले के बाद महाराष्ट्र से दिल्ली तक हलचल हुइ तेज। अमित शाह के दखल और ऑपरेशन टाइगर के बीच क्या हाईकोर्ट में पलटेगा पासा?
- Written By: गोरक्ष पोफली
एकनाथ शिंदे, अमित शाह और देवेंद्र फडणवीस (सोर्स: फाइल फोटो)
Amit Shah Will Help In Operation Tiger: महाराष्ट्र की राजनीति को दो दशकों तक आंदोलित करने वाले बहुचर्चित पवनराजे निंबालकर दोहरे हत्याकांड में 20 जून 2026 को विशेष सीबीआई अदालत का एक ऐसा फैसला आया, जिसने सबको चौंका दिया है। इस मामले में अदालत ने पूर्व गृहमंत्री डॉ. पद्मसिंह पाटील सहित सभी आठ आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए निर्दोष बरी कर दिया है। यह निर्णय न केवल निंबालकर परिवार के लिए एक बड़ा झटका है, बल्कि इसने राज्य के सियासी गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
विशेष अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि जिस सरकारी गवाह के आधार पर पूरा केस टिका था, उसकी गवाही पूरी तरह से अविश्वसनीय, संदिग्ध और विसंगत पाई गई। इसके अलावा, अदालत ने जांच एजेंसियों और पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी कड़े सवाल उठाए। अदालत के अनुसार, पुलिस ने जांच के दौरान आरोपियों के मोबाइल फोन जब्त नहीं किए और न ही उनके कॉल डिटेल रिकॉर्ड पेश किए। इस तकनीकी और साक्ष्यों की कमी के कारण यह साबित नहीं हो सका कि आरोपी आपस में संपर्क में थे या उन्होंने किसी साजिश को अंजाम दिया था। इसी घोर लापरवाही का फायदा आरोपियों को मिला और वे बरी हो गए।
ओमराजे निंबालकर की प्रतिक्रिया और राजनीतिक सस्पेंस
सांसद ओमराजे निंबालकर, जो पिछले 20 वर्षों से अपने पिता के न्याय के लिए लड़ रहे थे, इस फैसले से काफी आहत दिखे। उन्होंने इसे न्यायपालिका का दुर्भाग्य करार देते हुए सवाल किया कि अगर इन लोगों ने नहीं मारा, तो फिर पवनराजे को किसने मारा?
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हालांकि, राजनीतिक हलकों में यह चर्चा जोरों पर थी कि ओमराजे जल्द ही उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गुट में शामिल हो सकते हैं, लेकिन फैसले के बाद उन्होंने साफ किया कि उन्होंने अभी तक शिंदे गुट में जाने का कोई निर्णय नहीं लिया है।
दिल्ली में हलचल और अमित शाह का हस्तक्षेप
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार फैसले के तुरंत बाद महाराष्ट्र की सत्ता के शीर्ष नेतृत्व ने इस पर कड़ा रुख अपनाया। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस संवेदनशील मुद्दे पर सीधे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की और चर्चा की। इस उच्च-स्तरीय बैठक के बाद अमित शाह ने सीबीआई को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस फैसले के खिलाफ तुरंत उच्च न्यायालय में अपील दायर की जाए।
एक दिलचस्प घटना: अमित शाह, एकनाथ शिंदे और वो सीक्रेट कॉल
इस पूरी राजनीतिक उठापटक के बीच एक बेहद रोचक वाकया सामने आया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जब उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे दिल्ली में अमित शाह के साथ बैठक कर रहे थे, उसी समय उनके मोबाइल पर ओमराजे निंबालकर का फोन आया। अमित शाह जैसे कद्दावर नेता के सामने बैठे होने के बावजूद, शिंदे तुरंत अपनी सीट से उठे और कॉल अटेंड करने के लिए बाजू में चले गए। इस घटना ने राज्य में राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे दी है कि क्या पर्दे के पीछे कुछ नई समीकरणें पक रही हैं।
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क्या था पूरा मामला?
3 जून 2006 को नवी मुंबई के कलंबोली में एक्सप्रेस हाईवे पर पवनराजे निंबालकर की कार को रोककर अंधाधुंध गोलीबारी की गई थी, जिसमें उनकी और उनके ड्राइवर की मौत हो गई थी। सीबीआई ने आरोप लगाया था कि डॉ. पद्मसिंह पाटील ने 25 लाख रुपये की सुपारी देकर इस हत्या को अंजाम दिलवाया था। अब, 20 साल बाद आए इस फैसले ने मामले को फिर से एक नए कानूनी मोड़ पर खड़ा कर दिया है।
पद्मसिंह पाटील के परिवार ने इसे सत्य की जीत बताया है, जबकि सरकार के कड़े रुख ने संकेत दे दिया है कि यह कानूनी लड़ाई अब उच्च न्यायालय के गलियारों में और अधिक तीव्रता के साथ लड़ी जाएगी।
