

NEET Paper Leak Sikar Model News: नीट पेपर लीक मामले में लगातार नए और चौंकाने वाला खुलासे हो रहे हैं। बोर्ड परीक्षाओं के अंक और नीट पसेंटाइल का गोरखधंधा कोचिंग कारोबार पर संदेह की अंगुलियां उठा रहा है।
खासकर सीकर मॉडल देखने से पता चल रहा है कि इसके छात्रों की नीट सफलता दर सर्वाधिक है। इसमें भी गौर करने वाली बात यह है कि स्कूली पढ़ाई में औसत छात्र नीट में शीर्ष क्रम में सफलता का परचम लहरा रहे हैं।
गौरतलब है कि भारत के कुल कोचिंग उद्योग का आकार 58,000 करोड़ रुपये से अधिक है जिसमें महाराष्ट्र की हिस्सेदारी लगभग 15-18% है। महाराष्ट्र के कोचिंग बाजार का आकार 9,000 से 10,000 करोड़ रुपये के बीच होने का अनुमान है। राज्य के कुल कारोबार में मुंबई, पुणे और नागपुर जैसे महानगरों का सबसे बड़ा योगदान है।
नीट पेपर लीक कांड के तार राजस्थान से भी जुड़े हैं जहां एक बिवाल परिवार के लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। राजस्थान के दिनेश और मांगीलाल बिवाल मुख्य किरदार हैं। इन पर आरोप है कि इन्होंने अपने परिवार के बच्चों के लिए पेपर खरीदा था और इसके लिए मोटी रकम दी थी। इसमें चौंकाने वाली बात ये है कि इन 5 बच्चों में कम से कम 2 बच्चे पढ़ाई में काफी औसत थे और पिछली परीक्षाओं में भी वे कुछ खास अंक नहीं ला पाए थे। जांच एजेंसियां अब ये जांच कर रही हैं कि क्या पिछले साल भी इस परिवार ने नीट पेपर को खरीदा था। यह मामला पिछले साल सीकर में सामने आए कथित नीट पेपर लीक विवाद से भी जुड़ता दिखाई दे रहा है।
2024 में किसी सरकारी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन पाने के लिए लगभग 650 के स्कोर की जरूरत थी। सीकर में 650+ स्कोर करने वाले छात्रों का प्रतिशत 7.48% था, जबकि राष्ट्रीय औसत 1.29% था। यह 580% ज्यादा है।
असल में भारत की कुल मेडिकल सीटों में से 7% सीटें सीकर के हिस्से में आईं। यह मानते हुए कि कोचिंग का असर सफलता दर पर पड़ता है सीकर की तुलना एक और कोचिंग हब कोटा से की और पाया कि सीकर के नतीजे दोगुने बेहतर थे।
छात्रों की संख्या लगभग बराबर (दोनों जगह लगभग 27,000 छात्र) होने के बावजूद सीकर ने 650+ स्कोर करने वाले छात्रों की संख्या लगभग दोगुनी (2,037 बनाम 1,066) दी और उनका प्रतिशत भी लगभग दोगुना (7.48% बनाम 3.93%) रहा। सीकर उम्मीद से कहीं बेहतर प्रदर्शन कर रहा है और यह एक असाधारण मामला है। और सीकर के अंदर ही कुछ ऐसे केंद्र हैं जो इस नतीजे को प्रभावित कर रहे हैं।