

फेडनवीस ने स्पष्ट किया कि दोनों गुट अपने फैसले लेने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं।
NCP एनडीए का महत्वपूर्ण सहयोगी होने के कारण बड़े फैसलों पर चर्चा की उम्मीद है।
वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी के कारण इस मामले पर कोई टिप्पणी करना उचित नहीं है।
Devendra Fadnavis Statement On NCP Merger: महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुटों के संभावित विलय को लेकर सियासी हलचल तेज है। इस बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि शरद पवार और अजित पवार के नेतृत्व वाले दोनों गुट स्वतंत्र राजनीतिक दल हैं और उन्हें अपने फैसले खुद लेने का अधिकार है।
हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर विलय को लेकर कोई फैसला होता है तो एनडीए के सहयोगी दलों को भरोसे में लेना जरूरी होगा।
शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में फडणवीस ने कहा कि दोनों पार्टियों में शरद पवार, सुनेत्रा पवार, प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे और पार्थ पवार जैसे वरिष्ठ नेता हैं। ऐसे में उनकी ओर से इस मामले पर कोई टिप्पणी करना या उनके लिए फैसला लेना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि दोनों गुट अपने स्तर पर निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हैं। चूंकि एनसीपी एनडीए का महत्वपूर्ण सहयोगी दल है, इसलिए किसी भी बड़े राजनीतिक फैसले पर गठबंधन के साथ चर्चा की उम्मीद है।
दोनों एनसीपी गुटों के विलय की अटकलों को उस समय और हवा मिली, जब एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल ने गुरुवार को अस्पताल में शरद पवार से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में दोनों पार्टियों के फिर से एक होने की संभावनाओं पर चर्चा तेज हो गई।
इसके बाद एनसीपी नेता सुनील तटकरे ने शुक्रवार को एक बड़ा खुलासा किया। उन्होंने दावा किया कि अजित पवार के जीवित रहते दोनों गुटों के विलय को लेकर बातचीत हुई थी और इसके लिए 12 फरवरी की तारीख भी तय की गई थी। तटकरे के मुताबिक, अजित पवार ने विलय की प्रक्रिया को लेकर रूपरेखा भी तैयार की थी। उनका कहना था कि अगर अजित पवार आज जीवित होते तो दोनों एनसीपी गुट एक हो चुके होते।
वहीं, एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार ने विलय को लेकर वरिष्ठ नेताओं के हालिया बयानों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि अजित पवार के निधन के तुरंत बाद जिन नेताओं ने विलय की संभावनाओं से इनकार किया था, वे अब अचानक इसकी चर्चा क्यों कर रहे हैं?
रोहित पवार ने आरोप लगाया कि इस बदले हुए रुख के पीछे राजनीतिक दबाव और पार्टी के भीतर नेतृत्व से जुड़ी चुनौतियां हो सकती हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अजित पवार के जीवित रहते दोनों गुटों के विलय को लेकर बातचीत हुई थी। उनके मुताबिक, अजित पवार चाहते थे कि शरद पवार और पूरा पवार परिवार एकजुट रहे।
फिलहाल दोनों गुटों के विलय को लेकर कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है। ऐसे में अब सबकी नजरें एनसीपी के दोनों खेमों के अगले कदम और एनडीए के साथ होने वाली संभावित बातचीत पर टिकी हैं।