राकां स्थापना दिवस पर नेताओं की जुबानी जंग, तटकरे-भुजबल के बीच मंच से तीखी नोकझोंक

Tatkare Bhujbal Munde Political Row: राकां के स्थापना दिवस समारोह में संगठन विस्तार से ज्यादा नेताओं के बयान चर्चा में रहे। सुनील तटकरे और छगन भुजबल के बीच तीखी नोकझोंक होने की भी बात सामने आयी है।
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सुनील तटकरे, धनंजय मुंडे और छगन भुजबल (सौ. डिजाइन फोटो )
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NCP Foundation Day Event: गुरुवार को मुंबई में राकां सुनेत्रा पवार गुट ने अपना स्थापना दिवस मनाया लेकिन इस मंच का इस्तेमाल नेताओं ने पार्टी की विकास योजनाओं पर चर्चा करने से ज्यादा अपनी भड़ास निकालने के लिए किया।

राकां प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने कैबिनेट मंत्री छगन भुजबल के उस बयान पर चुटकी ली जिसमें उन्होंने कहा था कि वे शतरंज के नहीं बल्कि कबड्डी के खिलाड़ी हैं। तटकरे ने कहा कि भुजबल एक फिल्ममेकर, एक फिल्म एक्टर और एक कबड्डी प्लेयर हैं लेकिन वे राजनीति में शतरंज के भी अच्छे खिलाड़ी हैं। मनोहर जोशी, सुधीर जोशी, दत्ताजी नलावडे शिवसेना में रहते हुए 2 बार मेयर नहीं बन पाए लेकिन भुजबल दो बार मेयर बने। हम सभी जानते हैं कि वे किस तरह चेकमेट करते हैं।

अजित जैसे कड़े फैसले लेंगे

राकां के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए सुनेत्रा ने कहा कि हम सभी के लिए व्यक्तिगत हित से बढ़कर पार्टी का हित है, जो नेता व कार्यकर्ता पार्टी को मजबूत करने के लिए काम करेगा, उन्हें मौका दिया जाएगा। दादा (अजित) की तरह कड़े फैसले लेना मेरे नेचर में नहीं था, लेकिन जरूरत पड़ने पर मैं कड़े फैसले लेने से पीछे नहीं हटूंगी।

भुजबल का जवाब, राजनीति का खेल मत खेलो

छगन भुजबल ने तटकरे को करारा जवाब देते हुए कहा कि इस मंच पर राजनीति का खेल मत खेलो। मैंने राजनीति में जो मुकाम हासिल किया है, वह आसानी से संभव नहीं हुआ। इसके लिए काफी मेहनत की है, जब मैंने कांग्रेस छोड़कर राकां ज्वॉइन की तो मुझे कांग्रेस ने सीएम बनाने की पेशकश की लेकिन मैंने मना कर दिया। मैंने फुले, शाहू और आबेडकर के विचारों के लिए शरद पवार का समर्थन किया। इसलिए जो लोग कह रहे हैं कि मैं मौके की राजनीति करता हूं, यह गलत है।

धनंजय बोले, मुझे फिर मंत्री बनाओ

पूर्व मंत्री धनंजय मुंडे ने भी इस मंच का इस्तेमाल मंत्री पद से हटाए जाने के पीछे की राजनीति से किया, उन्होंने कहा कि जब अजित पवार जीवित थे तो कुछ लोगों ने मेरे बारे में गलत तस्वीर पेश की लेकिन अब मेरी उम्मीदें सुनेत्रा ताई पर टिकी है।

मंच पर बैठे लोगों को अवसर मिला है, लेकिन सामने बैठे कार्यकर्ता इंतजार कर रहे हैं कि उन्हें कब अवसर मिलेगा, पार्टी को कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन का उचित मूल्यांकन करना चाहिए। इस तरह मुंडे ने एक बार फिर मंत्री बनने की इच्छा प्रकट की।

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