

Maharashtra Maritime Board 16 Routes 26 Terminals: मुंबईकरों को यातायात के लिए जलमार्ग का नया विकल्प देने वाली वॉटर मेट्रो परियोजना को रफ्तार मिली है। बढ़ते सड़क यातायात के बीच मुंबईकरों को आवागमन आसान बनाने के लिए पहले चरण में 16 जलमार्ग और 26 टर्मिनल विकसित किया जाएगा।
इसके लिए महाराष्ट्र मेरीटाइम बोर्ड ने प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मुंबई के साथ नवी मुंबई, ठाणे, कल्याण, वसई और मीरा-भायंदर को जलमार्ग से जोड़ने की योजना है। जलमार्ग सेवा शुरू होने से यात्रियों को सड़क के समानांतर एक वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था मिलेगी और प्रमुख मार्गों पर वाहनों का दवाव कम करने में मदद मिल सकती है।
परियोजना के पूरा होने पर वॉटर ट्रांसपोर्ट मुंबईकरों के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है और इससे उन्हें ट्रैफिक जाम से आजादी मिलने की उम्मीद है। उल्लेखनीय है कि मुंबईकरों के लिए वॉटर ट्रांसपोर्ट सड़क यातायात के मुकाबले एक अतिरिक्त और वैकल्पिक परिवहन साधन उपलब्ध कराएगा।
मुंबई, नवी मुंबई, ठाणे, कल्याण, वसई और मीरा-भायंदर के बीच जलमार्ग संपर्क बढ़ने से रोजाना सफर करने वाले यात्रियों को कुछ मार्गों पर सड़क के बजाय जलमार्ग से यात्रा करने का विकल्प मिलेगा।
इससे ट्रैफिक जाम में फंसने का समय कम करने, यात्रा को अधिक सुविधाजनक बनाने और प्रमुख सड़क मार्गों पर वाहनों का दबाव घटाने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा, जलमार्ग के किनारे रहने वाले यात्रियों को नजदीकी टर्मिनल से सीधे दूसरे क्षेत्र तक पहुंचने का विकल्प मिलेगा। 26 टर्मिनलों के विकास से विभिन्न इलाकों के बीच कनेक्टिविटी बढ़ेगी। इलेट्रिक और हाइब्रिड नावों के इस्तेमाल से पर्यावरण अनुकूल परिवहन को भी बढ़ावा मिलेगा।
परियोजना के पहले चरण में आठ मौजूदा जलमार्गों का आधुनिकीकरण और आठ नए जलमार्ग विकसित किए जाएंगे। 26 टर्मिनलों के जरिए मुंबई शहर और आस-पास शहरों को जलमार्ग से जोड़ने की योजना है। इसके लिए महाराष्ट्र मेरीटाइम बोर्ड ने तीन वर्ष के लिए पीएमसी नियुक्ति की निविदा जारी की है।
पीएमसी टर्मिनलों की डिजाइन-इंजीनियरिंग, नौवहन व आपातकालीन सुविधाओं की योजना, निर्माण निविदाओं में तकनीकी सहायता और काम की निगरानी करेगा। साथ ही विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय, गुणवत्ता और परियोजना की प्रगति की भी जांच करेगा।
मुंबई की खाड़ियों और समुद्री मार्गों पर यात्री परिवहन शुरू करने के लिए जलमार्गों की गहराई, गाद की मात्रा, समुद्र तल की संरचना और ज्वार-भाटा का अध्ययन जरूरी होगा।
टर्मिनल बनाने के साथ जलमार्गों को नौवहन के लिए सक्षम बनाए रखना भी बड़ी चुनौती होगी।
वॉटर मेट्रो की व्यापक योजना के तहत करीब 250 किलोमीटर का जलमार्ग नेटवर्क विकसित किया जाना है। इसमें 21 मार्ग, 49 टर्मिनल और 207 इलेट्रिक व हाइब्रिड नावें शामिल हैं। हालांकि, मौजूदा पीएमसी निविदा केवल पहले चरण की सुविधाओं से संबंधित है।
पूरी परियोजना की अनुमानित लागत 6,066 करोड़ रुपए है। पीएमसी के चयन के बाद डिजाइन, तकनीकी योजना और निर्माण कार्य को दिशा मिलेगी। अगले तीन वर्ष परियोजना के लिए महत्वपूर्ण होंगे।