बूंद-बूंद पानी को तरसेगी मुंबई? जलाशयों में खत्म होता जल और नदारद मानसून के बादल, बड़ी चिंता का विषय
Mumbai Water Crisis Delayed Monsoon Lakes Drying Up: मुंबई में जून के मध्य तक मानसून की बेरुखी से जलाशयों का जलस्तर गिरा; अल नीनो के कारण मंडराया भीषण जल संकट।
- Written By: अनिल सिंह
मुंबईकरों पर मंडराया बूंद-बूंद पानी का संकट, मौसम विभाग की सैटेलाइट तस्वीरों ने बढ़ाई चिंता (फोटो क्रेडिट- IMD)
Mumbai Monsoon Update And Water Crisis: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई पर आगामी दिनों में बूंद-बूंद पानी के लिए तरसने का एक बहुत बड़ा संकट मंडरा रहा है। जून का आधा महीना बीत जाने के बाद भी मायानगरी मुंबई में मानसूनी बारिश का दूर-दूर तक नामोनिशान नजर नहीं आ रहा है। अमूमन हर साल जून की शुरुआत होते ही मानसूनी बादल मुंबई के आसमान पर डेरा डाल लेते थे और 10 जून से पहले महानगर में मूसलाधार बारिश का दौर शुरू हो जाता था। लेकिन इस साल मानसून की इस अप्रत्याशित बेरुखी ने नगर निगम प्रशासन और आम मुंबईकरों की धड़कनें तेज कर दी हैं।
बारिश न होने के कारण मुंबई को साल भर पानी की आपूर्ति करने वाले सभी प्रमुख जलाशय और झीलें लगातार सूखती जा रही हैं, जिससे आने वाले दिनों में स्थिति बेहद भयावह हो सकती है।
सूखते जलाशयों ने बढ़ाई मुसीबत
मुंबई को पानी की सप्लाई करने वाली तानसा, मोदक सागर, भातसा और विहार जैसी प्रमुख झीलों में पानी का संचय लगातार अपने न्यूनतम स्तर पर पहुंच रहा है। जलाशयों में पानी के इस तेजी से खत्म होते स्टॉक को देखते हुए बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) पहले से ही पूरे मुंबई महानगर में 10 फीसदी पानी की कटौती लागू कर चुका है। पानी की इस किल्लत के कारण मुंबईकरों को दैनिक कार्यों के लिए अभी से ही भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यदि जून के शेष दिनों में भी झीलों के जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश नहीं हुई, तो इस पानी की कटौती के प्रतिशत को और अधिक बढ़ाना पड़ सकता है।
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अल नीनो के चलते मानसून की सुस्त चाल
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस साल मानसून के इतनी देरी से सक्रिय होने और सुस्त रफ्तार के पीछे वैश्विक मौसम चक्र में आया ‘अल नीनो‘ का प्रभाव सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। अल नीनो के सक्रिय होने की वजह से न केवल मानसून की प्रगति धीमी हुई है, बल्कि इस पूरे साल सामान्य से कम वर्षा होने की आशंका भी जताई जा रही है। इस मौसमी बदलाव ने पर्यावरणविदों और कृषि विशेषज्ञों के साथ-साथ मुंबई के शहरी नीति निर्माताओं को भी गहरी चिंता में डाल दिया है, क्योंकि मुंबई पूरी तरह से अपनी वार्षिक जलापूर्ति के लिए मानसूनी वर्षा पर ही निर्भर रहती है।
पूरा जून सूखा रहा तो खड़ी होगी बड़ी चुनौती
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध वर्तमान सैटेलाइट तस्वीरों ने इस चिंता को और ज्यादा बढ़ा दिया है। इन नवीनतम सैटेलाइट इमेजेस को देखने से पता चलता है कि महाराष्ट्र और उसके तटीय इलाकों के आस-पास अभी तक मानसूनी बादलों का कोई मजबूत सिस्टम या जमावड़ा तैयार नहीं हो सका है। मौसम विभाग के इस विश्लेषण से साफ है कि अगले कुछ दिनों तक मुंबई को तेज बारिश से राहत मिलने के आसार बेहद कम हैं। जानकारों का कहना है कि अगर यही स्थिति पूरे जून महीने तक बनी रही, तो मुंबई में पीने के पानी के लिए अभूतपूर्व संकट खड़ा हो जाएगा।
