

Pune Pimpri Chinchwad Periphery Land Use Regulations PMRDA: पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ शहरों के आसपास तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच पुणे महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (पीएमआरडीए) ने 'फ्रिज एरिया' यानी शहरों की सीमा से लगे परिधीय क्षेत्रों में आवासीय विकास का रास्ता आसान कर दिया है।
इन क्षेत्रों की कृषि भूमि पर आवासीय उपयोग की अनुमति देने के लिए पीएमआरडीए ने एक विशेष कार्यपद्धति लागू की है। इसके तहत विकास प्रस्तावों की मंजूरी देते समय विभिन्न श्रेणियों के मौजूदा और प्रस्तावित रास्तों को एक साथ ध्यान में रखा जाएगा।
इससे लंबे समय से विकास अनुमति की प्रतीक्षा कर रहे भूखंड मालिकों को राहत मिलने की संभावना है। पीएमआरडीए महानगर आयुक्त डॉ. अभिजीत चौधरी ने 'एकीकृत विकास नियंत्रण एवं प्रोत्साहन नियमावली' (यूडीसीपीआर) के प्रावधानों के तहत यह कार्यपद्धति तत्काल लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य सड़क संपर्क को व्यवस्थित करना, आवासीय परियोजनाओं को गति देना और अनधिकृत निर्माण पर नियंत्रण रखते हुए नियोजित शहरीकरण को बढ़ावा देना है।
यूडीसीपीआर-2020 के अनुसार, महानगरपालिका सीमा से 2 किलोमीटर, नगर परिषद सीमा से 1किलोमीटर और नगर पंचायत सीमा से 500 मीटर तक के क्षेत्र को 'फ्रिज एरिया' माना जाता है। इन क्षेत्रों में निर्धारित अधिमूल्य लेकर कृषि भूमि के आवासीय उपयोग की अनुमति देने का प्रावधान है।
पीएमआरडीए के अनुसार, लोणावला नगर परिषद को छोड़कर पुणे शहर और पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका, 7 नगर परिषद और 2 नगर पंचायतों की सीमा से लगे क्षेत्रों में यह नई कार्यपद्धति लागू होगी। इससे इन निकायों की सीमा से सटे इलाकों में विकास प्रस्तावों पर निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है। नई कार्यपद्धति की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विकास अनुमति के प्रस्तावों की जांच के दौरान केवल एक ही सड़क व्यवस्था पर निर्भर नहीं रहा जाएगा।
साथ ही, किसी परियोजना के भीतर बनाए जाने वाले आंतरिक रास्तों को आसपास की जमीनों या मौजूदा मुख्य सड़कों से जोड़ना विकासकर्ताओं के लिए अनिवार्य होगा।
यदि संबंधित जमीन तक मौके पर नियमों के अनुसार आवश्यक चौड़ाई की सड़क उपलब्ध है, तो विकास प्रस्ताव पर आगे की प्रक्रिया में तेजी लाई जा सकेगी।
पुणे पीएमआरडीए का मानना है कि सड़क संपर्क को लेकर स्पष्ट व्यवस्था होने से विकास अनुमति के मामलों में अनिश्चितता कम होगी और बेतरतीब निर्माण पर भी अंकुश लगेगा। इसके साथ ही विकास को भी नई दिशा मिलेगी।
आयुक्त डॉ. अभिजीत चौधरी के अनुसार शहरों से लगे परिधीय क्षेत्रों में शहरीकरण का दबाव तेजी से बढ़ रहा है। यूडीसीपीआर के प्रावधानों के साथ नई कार्य पद्धति लागू होने से सड़कों का बेहतर नेटवर्क विकसित होगा और नियोजित आवासीय परियोजनाओं को गति मिलेगी। उनके अनुसार, इससे अनधिकृत विकास को नियंत्रित करने और इन क्षेत्रों के सुनियोजित विकास में मदद मिलेगी।