

मुंबई एसआरए की 22 सेवाओं को आसान बनाने का प्रस्ताव, दस्तावेजों और मंजूरी के चरणों में कटौती होगी।
वारिस का नाम दर्ज कराने के दस्तावेज 15 से घटाकर 4 करने की तैयारी।
पुनर्वास फ्लैट बेचने की अनुमति के कागजात 13 से घटाकर 5 होंगे; सरकारी मंजूरी के बाद अमल।
Mumbai SRA Slum Rehabilitation Authority: मुंबई के झोपड़ीधारकों को बड़ी राहत देने की तैयारी करते हुए झोपड़पट्टी पुनर्वास प्राधिकरण ने अपनी 22 सेवाओं को अधिक सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।
इस नई पहल के तहत अब लोगों को एसआरए सेवाओं के लिए जरूरी दस्तावेजों के भारी बोझ से मुक्ति मिलेगी और उन्हें बार-बार दफ्तर के चक्कर भी नहीं काटने होंगे।
एसआरए ने विभिन्न प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए जरूरी कागजातों और प्रशासनिक चरणों में भारी कटौती करने से जुड़ा विस्तृत प्रस्ताव राज्य के आवास विभाग को भेज दिया है।
राज्य सरकार की अंतिम मंजूरी के बाद इस नए नियम पर पूरी तरह अमल शुरू हो जाएगा, जिससे आम नागरिकों के समय और धन दोनों की सीधी बचत होगी। यह जानकारी मुंबई एसआरए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. महेंद्र कल्याणकर ने दी।
महाराष्ट्र सरकार के 'आपले सरकार' पोर्टल के जरिए एसआरए की 22 ऑनलाइन सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इन सेवाओं को सरल और नागरिकों के अनुकूल बनाने के लिए मौजूदा कार्यप्रणाली की समीक्षा की गई। इसमें सामने आया कि
कई सेवाओं के लिए बार-बार एक ही जानकारी मांगी जाती है और फाइलें भी कई प्रशासनिक स्तरों पर अटकती हैं।
इन खामियों को दूर करने के लिए प्रस्तावित सुधारों के तहत दस्तावेजों की संख्या और मंजूरी के चरण कम किए जाएंगे, एसआरए के मुताबिक पात्र झोपड़ीधारक की मृत्यु के बाद वारिस का नाम दर्ज कराने के लिए पहले 15 दस्तावेज जमा करने पड़ते थे। जिन्हें घटाकर अब 4 किया जाएगा। वहीं, प्रशासनिक स्तर 3 से घटाकर 2 रह जाएंगे।
पुनर्वास फ्लैट बेचने की अनुमति के लिए भी दस्तावेजों की संख्या 13 से घटाकर 5 की जाएगी और मंजूरी के चरण 3 से घटाकर 2 किए जाएंगे। इसी तरह झोपड़ीधारकों की पात्रता तय करने के लिए आवश्यक दस्तावेज 10 से घटाकर 5 और प्रशासनिक स्तर 5 से घटाकर 3 करने का प्रस्ताव है।
कई बार नागरिकों को उन दस्तावेजों के लिए भी सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते है, जो एसआरए के रिकॉर्ड में पहले से दर्ज होते हैं। नई व्यवस्था में ऐसे कागजात दोबारा जमा करने की जरूरत नहीं होगी। इससे आवेदकों की परेशानी कम होगी। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कानूनी औपचारिकताओं जांच की प्रक्रिया पूर्ववत जारी रहेगी।
एसआरए का उद्देश्य है कि आम लोगों को छोटे-छोटे कामों के लिए दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़े। डॉ. कल्याणकर ने बताया कि गैर-जरूरी कागजी औपचारिकताएं और फाइलों के आगे बढ़ने में होने वाली देरी को खत्म करना ही इन सुधारों का मुख्य मकसद है।
एसआरए की सेवाओं को सरल बनाना हमारी प्राथमिकता है। अनावश्यक दस्तावेजों की मांग और दफ्तर की लेटलतीफी खत्म करने के लिए ये सुधार प्रस्तावित किए गए हैं। शासन की मंजूरी मिलते ही इसे जमीन पर उतार दिया जाएगा।
डॉ. महेंद्र कल्याणकर, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, एसआरए, मुंबई