ऑटो-टैक्सी चालकों को मिलेगी राहत या बढ़ेगी सख्ती? जानें बैठक के बाद मराठी अनिवार्यता पर क्या बोले मंत्री सरनाईक
Pratap Sarnaik Statement: महाराष्ट्र में रिक्शा-टैक्सी चालकों के लिए मराठी अनिवार्य करने पर परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने अहम बैठक की। यूनियन ने भाषा सीखने के लिए 6 महीने की मोहलत मांगी है।
- Written By: सूर्यप्रकाश मिश्र | Edited By: आकाश मसने
ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में मौजूद मंत्री प्रताप सरनाईक (सोर्स: एक्स@PratapSarnaik)
Marathi Mandatory For Rickshaw And Taxi Drivers Controversy: मुंबई एमएमआर सहित राज्य भर में रिक्शा-टैक्सी-कैब चालकों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य किए जाने संबधी परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के आदेश को लेकर मचा घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार को स्वयं परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने इस मुद्दे पर यूनियन के पदाधिकारियों एवं हिंदी भाषी नेताओं के साथ बैठक की। बैठक में सभी पदाधिकारियों ने इस बात को स्वीकार किया कि रिक्शा टैक्सी चालकों को मराठी भाषा आनी ही चाहिए परंतु 1 मई से उनके ऊपर सख्ती न करते हुए उन्हें मराठी सीखने के लिए कम से कम 6 माह का समय दिया जाना चाहिए।
इस बैठक में पूर्व सांसद संजय निरुपम, रिक्शा टैक्सी मेंस यूनियन के अध्यक्ष शशांक राव, हाजी अराफात शेख, पूर्व मंत्री उत्तरभारतीय नेता चंद्रकांत त्रिपाठी, शिवसेना उत्तरभारतीय संगठक शशि यादव,बीजेपी उत्तरभारतीय नेता आर.डी यादव, शिवसेना नगरसेवक सिद्धार्थ पांडेय, शिवसेना के पूर्व नगरसेवक विक्रमप्रताप सिंह सहित परिवहन विभाग एवं आरटीओ के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
क्या बोले मंत्री प्रताप सरनाईक?
बैठक के बाद परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा कि मराठी अनिवार्यता को हमारी भूमिका से सभी यूनियन के सभी पदाधिकारी भी सहमत हैं। परिवहन मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस निर्णय से किसी की रोजी रोटी पर परिणाम नही होने वाला है। रोजगार निर्माण की नीति को महाराष्ट्र में सर्वाधिक बढ़ावा दिया जाता है। सरनाईक ने स्पष्ट किया कि उन्होंने अपनी भूमिका बदली नहीं है। यहां रोजी रोजगार करने वालों को मराठी बोलनी ही होगी।
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🗓️ २७ एप्रिल २०२६ l 📍 मंत्रालय आज मंत्रालयातील माझ्या दालनात रिक्षा-टॅक्सी चालक प्रतिनिधिंसोबत महत्वाची बैठक संपन्न झाली. या बैठकीत राज्य शासनाच्या मराठी सक्तीविषयी धोरणासंदर्भात सखोल चर्चा करण्यात आली. यावेळी सार्वजनिक वाहन चालकांना मराठी यावे याबाबत सर्वांचे एकमत असल्याचे… pic.twitter.com/si3FOHXXqf — Pratap Baburao Sarnaik (@PratapSarnaik) April 27, 2026
रिक्शा-टैक्सी ड्राइवरों ने मराठी सीखने मांगा वक्त
मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा कि यूनियनों ने रिक्शा टैक्सी ड्राइवरों को मराठी सीखने के लिए 3 माह से लेकर एक साल तक का वक्त मांगा है। इसका निर्णय मंगलवार को राज्य के सभी 59 आरटीओ के साथ बैठक में लिया जाएगा। परिवहन मंत्री ने कहा कि कोंकण मराठी साहित्य परिषद एवं यूनियनों ने भी मराठी सिखाने को लेकर तैयारी दिखाई है। सभी राज्य सरकार की भूमिका से सहमत हैं, और हम भी मोहलत देने को तैयार हैं।
परिवहन मंत्री ने यह भी कहा कि मुंबई एमएमआर में यात्रियों की भी जवाबदारी है कि वे भी मराठी में बोलें। उन्होंने कहा कि 2019 का जीआर है। हर रिक्शा टैक्सी चालक को स्थानीय भाषा यानी मराठी लिखने, बोलने समझने का ज्ञान होना ही चाहिए। इस मामले में कुछ लोग वेवजह राजनीति कर रहे हैं।
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प्रताप सरनाईक ने कहा कि लायसेंस बैच या परमिट देते समय ही एफिडेविट के तहत चालकों को मराठी भाषा अनिवार्य की गई है। परिवहन मंत्री ने कहा कि भाषा किसी पर लादी नहीं जा रही है। बल्कि यह निर्णय यात्रियों के साथ बेहतर संवाद एवं स्थानीय भाषा के सम्मान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया गया है। परिवहन मंत्री ने यह भी कहा कि अधिकांश रिक्शा टैक्सी ड्राइवरों को मराठी भाषा बोलनी समझनी आती है।
संजय निरुपम बोले- 6 माह का मिले समय
शिवसेना उत्तरभारतीय संगठक शशि यादव ने परिवहन मंत्री की बैठक को सकारात्मक बताते हुए कहा कि मुंबई एमएमआर के अधिकांश परप्रांतीय रिक्शा टैक्सी चालकों को डर है था कि कहीं उनका लाइसेंस बैच न छीन लिया जाए। आम बोलचाल वाली मराठी सीखने के लिए परिवहन मंत्री से वक्त मांगा गया जिसके लिए उन्होंने समय दिए जाने पर सहमति जताई है। शिवसेना नेता संजय निरुपम ने भी कहा कि किसी को मराठी का विरोध नहीं है। रिक्शा टैक्सी ड्राइवरों को 6 माह का समय दिया जाना चाहिए।
