एकनाथ शिंदे (सोर्स: सोशल मीडिया)
मुंबई: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने विधानसभा में आश्वासन देते हुए कहा मुंबई में पुरानी और जर्जर इमारतों के पुनर्विकास की प्रक्रिया अब तेज होगी। इस दिशा में आने वाली अड़चनों को दूर करने के लिए जल्द ही जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक की जाएगी। विधानसभा में विधायक अमीन पटेल, पराग आलवणी, अजय चौधरी, योगेश सागर, सुनील राउत, जयंत पाटिल, नाना पटोले, अतुल भातखलकर और छगन भुजबल ने इस मुद्दे पर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव रखा था।
इसके जवाब में उपमुख्यमंत्री शिंदे ने कहा कि अगर बीएमसी या किसी सक्षम प्राधिकरण द्वारा किसी इमारत को खतरनाक घोषित किया जाता है, तो पुनर्विकास का पहला अवसर मालिक को दिया जाएगा। अगर छह महीनों में मालिक पुनर्विकास प्रस्ताव नहीं देता, तो यह अधिकार कब्जेदार या किराएदारों की सहकारी गृहनिर्माण सोसायटी को मिलेगा। यदि वे भी प्रस्ताव पेश करने में असफल रहते हैं, तो मुंबई इमारत मरम्मत एवं पुनर्रचना मंडल (एमबीआरआरबी) भूमि मुंबई अधिग्रहण कर पुनर्विकास करेगा।
विधानसभा में विधायक वरुण सरदेसाई ने खार (पूर्व) के अटके पुनर्विकास प्रोजेक्ट का मुद्दा उठाया। इस पर जवाब देते हुए उपमुख्यमंत्री शिंदे ने कहा कि सरकार आवासीय परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करेगी। खार (पूर्व) में झोपड़पट्टी पुनर्वास परियोजना के तहत निर्माण का काम शिवालिक वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड कर रहा है। कंपनी ने दिसंबर 2029 तक शेष 5,281 फ्लैट्स का निर्माण पूरा करने की योजना प्रस्तुत की है। इस योजना के अनुसार, अगले पांच वर्षों में काम पूरा किया जाएगा।
शिंदे ने बताया कि अब तक एमबीआरआरची ने 854 इमारत मालिकों को नोटिस जारी किए हैं। इनमें से 67 मालिकों ने पुनर्विकास प्रस्ताव पेश किए हैं, जिनमें से 30 को अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) जारी कर दिया गया है। राज्य सरकार जल्द ही एक नई गृहनिर्माण नीति लाने जा रही है, जिससे आम नागरिकों को किफायती घर मिलेंगे, उन्होंने कहा कि सरकार रुके हुए पुनर्विकास प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि विस्थापित नागरिकों को मुंबई में ही उनका हक का घर मिल सके। मुंबई में रुके हुए पुनर्विकास प्रोजेक्ट के कारण हजारों नागरिकों को शहर छोड़कर जाना पड़ा है।
854 इमारत मालिकों को नोटिस जारी।
67 मालिकों में पुनर्विकास प्रस्ताव पेश किए।
30 मालिकों को अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) जारी।
5,281 फ्लैट्स का निर्माण दिसंबर 2029 तक पूरा करने की योजना।
झुग्गीवासियों को अब तक 20.50 करोड़ रुपये का किराया दिया गया।
1.226 झुग्गीवासियों के लिए 18.81 करोड़ रुपये जमा।
सी-1 (अति-खतरनाक) – तुरंत खाली कर पुनर्विकास का प्रस्ताव
सी-2 (मरम्मत योग्य) – मरम्मत की जाएगी
सी-3 (कम जोखिम वाली) – नियमित रखरखाव
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शिंदे ने साफ किया कि अगर तय योजना के अनुसार काम नहीं हुआ, तो संबंधित डेवलपर पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, झोपड़पट्टी पुनर्वास परियोजना के तहत झुग्गीवासियों के किराया भुगतान और अन्य समस्याओं के समाधान के लिए संयुक्त बैठक आयोजित की जाएगी। मंत्री शंभूराज देसाई ने कहा कि पुनर्वास योजना के तहत झुग्गीवासियों को अब तक 20.50 करोड़ रुपये का किराया दिया गया है। इसके अलावा, 1,226 झुग्गीवासियों के लिए 18.81 करोड़ रुपये की राशि जमा कराई गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यायालय के समक्ष परियोजना को समय पर पूरा करने का वादा किया गया है और अगर इसमें देरी होती है, तो सरकार सख्त कदम उठाएगी।