मुंबई ऑक्सीजन सप्लाई (सौ. सोशल मीडिया )
Mumbai Oxygen Supply Contract Row: मुंबई के सभी मेडिकल कॉलेजों और उपनगरीय अस्पतालों को लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन गैस की आपूर्ति के लिए ठेकेदारों की अवधि और राशि में फेरबदल होने की बात प्रशासन द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव में सामने आई, जिसे लेकर स्थायी समिति में सदस्य आक्रामक हो गए।
उन्होंने इस प्रस्ताव को पुनः भेजने की मांग की। कोरोना काल में ऑक्सीजन आपूर्ति में अनियमितता और कथित आर्थिक घोटाले को लेकर भाजपा ने उद्धव सेना पर लगातार निशाना साधा था। इसी ऑक्सीजन मुद्दे ने बुधवार को स्थायी समिति की बैठक में जोर पकड़ा।
नगर निगम अस्पतालों में ऑक्सीजन आपूर्ति के ठेके की राशि में वृद्धि के मुद्दे पर आपत्ति जताई गई और ऑक्सीजन आपूर्ति का ऑडिट कराने की मांग की गई। सदस्यों ने सवाल उठाया कि ऑक्सीजन की मांग और आपूर्ति की वास्तविक स्थिति क्या है। प्रस्ताव में ठेका अवधि, ऑक्सीजन की मांग और ठेका राशि में हुई बढ़ोतरी का उल्लेख था।
मुंबई ऑक्सीजन सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट विवाद
ऑक्सीजन आपूर्ति के लिए मूल ठेका राशि 42 करोड़ 93 लाख 55 हजार रुपये थी, जो बढ़कर 21 करोड़ 77 लाख 71 हजार रुपये की वृद्धि के साथ 45 करोड़ 71 लाख 26 हजार रुपये हो गई। चर्चा के दौरान राष्ट्रवादी काग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) की सईदा खान ने वर्तमान ऑक्सीजन आपूर्ति की स्थिति की जानकारी देने और ऑडिट कराने की मांग की।
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वहीं एमआईएम के नगरसेवक जमीर कुरेशी ने पूछा कि ऑक्सीजन की मांग क्यों बढ़ी और क्या अस्पतालों में बेड व मरीजों की संख्या बढ़ी है। उन्होंने यह भी कहा कि अधिक मात्रा में खरीद पर दर कम होनी चाहिए, भाजपा की शीतल गंभीर ने कोविड के बाद अतिरिक्त ऑक्सीजन उपयोग पर सवाल उठाया और ठेके में बार-बार फेरबदल पर भी आपत्ति जताई। शिंदे सेना के अमेय घोले ने भी ऑक्सीजन आपूर्ति का ऑडिट कराने की मांग की। अंततः स्थायी समिति अध्यक्ष प्रभाकर शिंदे ने कहा कि प्रशासन से जवाब मिलने तक प्रस्ताव को फिलहाल स्थगित रखा जाएगा।