मुंबई-नवी मुंबई एयरपोर्ट मेट्रो-8 प्रोजेक्ट की रफ्तार बढ़ी; सिडको ने मंजूरियों के लिए मंगाईं बोलियां

Mumbai Metro Line 8 Infrastructure: मुंबई और नवी मुंबई हवाई अड्डे को जोड़ने वाली 35 किमी लंबी मेट्रो लाइन-8 के लिए सिडको ने प्रक्रिया तेज की। वैधानिक मंजूरियों के लिए सलाहकार से मांगी बोलियां।
CIDCO accelerates Mumbai-Navi Mumbai Airport Metro Line-8 project by inviting bids for consultants to secure key environmental and statutory clearances.
मेट्रो लाइन (सोर्स - सोशल मिडिया)
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Mumbai Airport Metro Development: छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को सीधे जोड़ने वाली बहुप्रतीक्षित मेट्रो लाइन-8 परियोजना ने रफ्तार पकड़ ली है। सिडको ने वैधानिक मंजूरियां प्राप्त करने के लिए सलाहकार नियुक्ति को लेकर बोलियां आमंत्रित की है। 35 किलोमीटर लंबा यह मेट्रो कॉरिडोर मुंबई और नवी मुंबई के बीच तेज, सुविधाजनक और निर्बाध हवाई अड्डा कनेक्शन उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

सिडको द्वारा जारी निविदा के अनुसार चयनित सलाहकार को 15 महीनों के भीतर परियोजना के लिए आवश्यक सभी प्रमुख अनुमतियां प्राप्त करनी होंगी। इसके लिए 2।68 लाख रुपए की अग्रिम जमा राशि निर्धारित की गई है। सलाहकार को सीआरजेड, वन,

वन्यजीव, मैंग्रोव, फ्लेमिंगो अभयारण्य और नमक पैन प्राधिकरण से मंजूरी हासिल करनी होगी। जहां मैंग्रोव हटाने की आवश्यकता होगी, वहां उच्च न्यायालय से

एनओसी प्राप्त करने की जिम्मेदारी भी उसी की होगी। परियोजना के तहत पर्यावरण प्रभाव आकलन और पर्यावरण प्रबंधन योजना तैयार की जाएगी।

पीपीपी मॉडलः 9.5 किलोमीटर लंबा होगा भूमिगत मार्ग

पीपीपी मॉडल पर विकसित होने वाली मेट्रो लाइन-8 में 9.5 किलोमीटर लंबा भूमिगत मार्ग होगा, जिसमे छह स्टेशन शामिल रहेंगे। वहीं 25.5 किलोमीटर का एलिवेटेड कॉरिडोर 14 स्टेशनों के साथ विकसित किया जाएगा। यह मार्ग कुर्ला, एलटीटी, घाटकोपर, वाशी, नेरुल, सीवु और तारघर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से होकर गुजरेगा। परियोजना में ठाणे क्रीक पर एक नया पुल भी प्रस्तावित है।

इसके अलावा मानखुर्द के मंडाले क्षेत्र में प्रस्तावित अंतरराज्यीय बस टर्मिनस के निकट 27.2 हेक्टेयर भूमि पर मेट्रो डिपो विकसित किया जाएगा। यह परियोजना मुंबई महानगर क्षेत्र की भविष्य की परिवहन जरूरतों को पूरा करने और दोनों अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों के बीच तेज संपर्क स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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