मुंबई के लोअर परेल इलाके में गैस सिलेंडर खरीदने के लिए उपभोक्ताओं की लंबी कतारें लगी (सोर्स: सोशल मीडिया)
Mumbai LPG Crisis Video: देश में रसोई गैस (LPG) काे लेकर केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार एक ही दावा कर रही है कि गैस पर्याप्त मात्रा में है। लेकिन देश के हर कोने से आ रही तस्वीरें कुछ और ही बयां कर रही हैं। देश की आर्थिक राजधानी में इन दिनों रसोई गैस (LPG) को लेकर हड़कंप मचा हुआ है। मुंबई लोअर परेल स्थित एक डिस्ट्रीब्यूशन पॉइंट के बाहर की तस्वीरों ने सरकार के उन दावों पर सवालिया निशान लगा दिया है, जिसमें कहा गया था कि देश में गैस की कोई कमी नहीं है। चिलचिलाती धूप में खाली सिलेंडर लेकर खड़े लोग घंटों अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन कई को अंत में निराशा ही हाथ लग रही है।
न्यूज एजेंसी ANI सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट किया गया। इस वीडियो में मुंबई के लोअर परेल इलाके में गैस सिलेंडर खरीदने के लिए ग्राहकों की लंबी कतारें लगी दिख रही है। इस पोस्ट में लिखा गया कि भारत सरकार के अनुसार, “LPG और PNG के मामले में भी स्थिति सामान्य है। हमारी रिफाइनरियां अपनी पूरी क्षमता पर या उससे भी ज़्यादा क्षमता पर काम कर रही हैं, और घरेलू LPG उत्पादन में लगभग 40% की बढ़ोतरी हुई है। चूंकि भारत आयात पर बहुत ज़्यादा निर्भर है, लगभग 90% LPG आयात होर्मुज के रास्ते होता है, इसलिए सरकार ने कमर्शियल सप्लाई के बजाय घरेलू ग्राहकों को प्राथमिकता देने का फैसला किया है।”
#WATCH | Maharashtra | Consumers form long queues to buy gas cylinders in Mumbai’s Lower Parel area According to the Government of India, “The situation is comfortable with respect to LPG and PNG as well. Our refineries are operating at full or even above capacity, and domestic… pic.twitter.com/vSxH4ExySy — ANI (@ANI) March 28, 2026
हालांकि, इस पोस्ट के किए गए वीडियो में लोअर परेल की सड़कों पर लगी लंबी कतारें इन सरकारी आंकड़ों को मुंह चिढ़ाती नजर आ रही हैं। उपभोक्ताओं का सवाल है कि यदि सप्लाई पर्याप्त है, तो सिलेंडर उनके घरों तक क्यों नहीं पहुंच रहे?
गैस की यह किल्लत सिर्फ लोअर परेल तक सीमित नहीं है। इस महीने की शुरुआत में कांदिवली के अशोक नगर में भी ऐसे ही दृश्य देखे गए थे। वहां स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई थी कि भीड़ को नियंत्रित करने और सुचारू वितरण सुनिश्चित करने के लिए पुलिस बल तैनात करना पड़ा। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सिलेंडर वाला ट्रक आने की सूचना मिलते ही लोग तड़के सुबह से ही कतारों में लग जाते हैं। कई लोग तो अपनी दिहाड़ी छोड़कर या ऑफिस से छुट्टी लेकर सिर्फ इसलिए खड़े रहते हैं ताकि उनके घर का चूल्हा जल सके।
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विशेषज्ञों और वितरण केंद्रों का मानना है कि इस भीड़ का एक बड़ा कारण ‘पैनिक बुकिंग’ भी है। लोगों में यह डर बैठ गया है कि आने वाले समय में स्टॉक खत्म हो सकता है, जिससे वे जरूरत से पहले ही सिलेंडर रिफिल कराने की होड़ में लग गए हैं।
लेकिन, बार-बार सामने आ रही ये घटनाएं ‘लास्ट-माइल डिस्ट्रीब्यूशन’ यानी वितरक से उपभोक्ता तक पहुंचने वाली कड़ी में बड़े छेद को उजागर करती हैं। जनता अब मांग कर रही है कि सरकार केवल आंकड़ों का खेल न खेले, बल्कि वितरण व्यवस्था में सुधार कर साफ-सुथरा संवाद कायम करे ताकि इस अफरा-तफरी को रोका जा सके।