पास्ता में निकला मरा हुआ कॉकरोच! मुंबई के मशहूर किड्स प्ले ज़ोन का VIDEO वायरल, हाइजीन पर उठे गंभीर सवाल

Mumbai Kids Play Zone Cockroach: मुंबई के लोअर परेल में किड्स प्ले ज़ोन में पास्ता में मरा कॉकरोच मिलने से हड़कंप मच गया। VIDEO वायरल होने के बाद हाइजीन और फूड सेफ्टी पर सवाल उठे।
mumbai kids play zone cockroach found in pasta viral video
पास्ता में कॉकरोच (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Cockroach Found In Pasta Viral Video: आर्थिक राजधानी के लोअर परेल जैसे पॉश इलाके से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर माता-पिता की चिंताएं बढ़ा दी हैं। मुंबई के एक प्रसिद्ध बच्चों के इंडोर प्ले सेंटर में मस्ती करने आए एक परिवार के लिए दोपहर का भोजन किसी डरावने अनुभव में बदल गया। यहां कैंटीन द्वारा परोसे गए पास्ता की प्लेट में एक मरा हुआ कॉकरोच पाया गया, जिसके बाद इस घटना की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।

इस घटना को लेकर एक सतर्क अभिभावक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पास्ता की थाली में मौजूद कॉकरोच के विजुअल्स साझा किए। जिस स्थान को बच्चे और परिवार सुरक्षित और मनोरंजन के लिए चुनते हैं, वहां स्वच्छता के ऐसे निम्न स्तर ने हर किसी को हैरान कर दिया है। वायरल पोस्ट पर कई यूजर्स ने अपनी चिंता व्यक्त की और फैमिली-फ्रेंडली कहलाने वाले इन भोजनालयों में हाइजीन स्टैंडर्ड्स पर कड़े सवाल उठाए हैं।

बच्चों के लिए गंभीर स्वास्थ्य जोखिम

असुरक्षित भोजन केवल एक लापरवाही नहीं, बल्कि एक बड़ी वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती है। WHO के आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि दुनिया में लगभग 866 मिलियन लोग मतलब हर 9 में से 1 व्यक्ति दूषित भोजन खाने के कारण बीमार पड़ते हैं और हर साल 1.52 मिलियन लोगों की मृत्यु हो जाती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चे इन बीमारियों के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील होते हैं। इसका जैविक कारण यह है कि बच्चों का इम्यून सिस्टम अभी विकसित हो रहा होता है, जिससे उनके लिए बैक्टीरिया, वायरस और परजीवियों से लड़ना मुश्किल होता है। इसके अलावा, उल्टी या दस्त की स्थिति में बच्चों के शरीर से तरल पदार्थ बहुत तेजी से बाहर निकलते हैं, जिससे उनमें डिहाइड्रेशन का खतरा वयस्कों की तुलना में कहीं अधिक होता है।

फूड लिटरेसी की जरूरत

मुंबई शहर की इस घटना ने अभिभावकों को अपने बच्चों के साथ फूड लिटरेसी पर बातचीत शुरू करने का एक अवसर दिया है। फूड लिटरेसी का अर्थ केवल पढ़ने-लिखने से नहीं, बल्कि उस ज्ञान और व्यवहार से है जो सुरक्षित और स्वस्थ भोजन के चयन में मदद करता है। माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों को खाना खत्म करने के लिए मजबूर करने के बजाय उनसे पूछें कि क्या भोजन उन्हें ताजा लग रहा है या फल खाने से पहले धोना क्यों जरूरी है?

बच्चों को बोलना सिखाएं

अक्सर बच्चे भोजन में कुछ असामान्य दिखने पर भी बोलने में हिचकिचाते हैं। माता-पिता को उन्हें यह समझाना चाहिए कि यदि भोजन का स्वाद या गंध अजीब लगे, तो उसे तुरंत खाना बंद कर दें और किसी भरोसेमंद वयस्क को सूचित करें। यह उन्हें शक करना नहीं, बल्कि जिम्मेदार बनना सिखाता है।

अंततः, यह घटना मुंबई के फूड बिजनेस संचालकों के लिए एक चेतावनी है कि वे सुरक्षा मानकों में सुधार करें। वहीं, अभिभावकों के लिए यह एक सबक है कि बच्चों को हाथ धोने, अदृश्य कीटाणुओं को समझने और अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने की आदत डालें।

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