

Shiv Sena Symbol Case Supreme Court Hearing: महाराष्ट्र की राजनीति का सबसे बड़ा सवाल शिवसेना किसकी है? उद्धव ठाकरे की या एकनाथ शिंदे की? एक बार फिर देश की सर्वोच्च अदालत की चौखट पर गूंजा। गुरुवार, 30 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में शिवसेना के नाम और चुनाव चिन्ह धनुष-बाण को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और गरमागरम सुनवाई हुई।
यह कानूनी लड़ाई अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है, जहां दोनों गुटों के बीच दांव पर न केवल पार्टी का नाम है, बल्कि दिवंगत बालासाहेब ठाकरे की विरासत भी है।
ठाकरे गुट की ओर से दिग्गज वकील कपिल सिब्बल ने मोर्चा संभाला। CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के सामने सिब्बल ने बेहद आक्रामक लहजे में अपना पक्ष रखा। सिब्बल ने तर्क दिया कि चुनाव चिन्ह किसी भी राजनीतिक दल के लिए उसकी आत्मा की तरह महत्वपूर्ण होता है और इसीलिए इस पर ठाकरे गुट का दावा वैध है।
सुनवाई के दौरान सिब्बल ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने फैसला सुनाते समय कई अहम पहलुओं की अनदेखी की है। सिब्बल का सबसे बड़ा प्रहार यह था कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने जो पार्टी का संविधान पेश किया था, उसे चुनाव आयोग ने खोलकर देखना भी गवारा नहीं किया। उन्होंने संवैधानिक प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जब सुनील प्रभु पहले से ही पार्टी के Whip थे, तो ऐसी क्या स्थिति थी कि नया प्रतोद नियुक्त किया गया?
यह विवाद साल 2022 में शुरू हुआ था, जब एकनाथ शिंदे ने एक बड़ी बगावत करते हुए शिवसेना को दो धड़ों में बांट दिया था। बाद में केंद्रीय चुनाव आयोग ने शिंदे गुट को ही असली शिवसेना करार देते हुए उन्हें धनुष-बाण का चुनाव चिन्ह आवंटित कर दिया था। उद्धव ठाकरे ने आयोग के इसी फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जो पिछले चार वर्षों से विचाराधीन है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक महत्वपूर्ण निर्देश दिया है। कोर्ट ने सिब्बल और संबंधित पक्षों को निर्देश दिया कि वे अब तक के सभी घटनाक्रमों और कानूनी बिंदुओं को संकलित करके कोर्ट के सामने पेश करें।
अब सभी की निगाहें मंगलवार, 4 अगस्त 2026 पर टिकी हैं, जब इस मामले की अगली सुनवाई होगी। ठाकरे गुट के सांसद अनिल देसाई ने सुनवाई के बाद सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें न्यायदेवता और सर्वोच्च न्यायालय पर पूरा भरोसा है। जैसे-जैसे महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला राज्य की राजनीति की दिशा और दशा तय करने वाला साबित होगा।