मुंबई में बाहर का खाना हुआ महंगा: होटल और रेस्तरां में 10 से 15% तक बढ़ सकते हैं दाम, आम जनता पर बोझ

Mumbai Food Price Hike: मुंबई के होटलों और रेस्तरांओं में कच्चा माल और संचालन खर्च बढ़ने से खाने-पीने की चीजों के दाम 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ने के आसार हैं, जिससे आम जनता और छात्रों का बजट बिगड़ेगा।
Eating out has become more expensive in Mumbai
खाना महंगा, प्रतीकात्मक तस्वीरसोर्स- सोशल मीडिया
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Highlights

  • मुंबई में होटल की थाली 10–15% महंगी होने के आसार।

  • कुछ होटल 5–8% बढ़ा सकते हैं दाम।

  • महंगाई से छात्रों और नौकरीपेशा लोगों का बजट बिगड़ेगा।

Mumbai Hotels Restaurants Food Price Hike: मुंबई में अब बाहर खाना खाने वालों को अपनी जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ेगी, क्योंकि शहर के होटलों और रेस्तरांओं में भोजन की थाली 10 से 15 फीसदी तक महंगी होने के आसार हैं। सब्जियों, दालों और जरूरी सामानों की बढ़ती कीमतों से परेशान होटल संगठन 'आहार' ने मेन्यू के दाम बढ़ाने के साफ संकेत दिए हैं।

इस संभावित मूल्यवृद्धि का सीधा असर मुंबईकरों समेत एमएमआर में रहने वाले आम जनता पर पड़ेगा। इसके चलते उनकी जेबें भी खाली हो सकती हैं। वहीं, घर से दूर रहकर पढ़ाई करने वाले छात्रों और नौकरीपेशा लोगों का मासिक खर्च गड़बड़ा जाएगा और उन पर महंगाई का दोहरा बोझ पड़ना तय है।

बीते कुछ महीनों में खुदरा बाजार में दाल, तेल, मसाले और हरी सब्जियों के दाम आसमान छूने से होटलों की लागत बेतहाशा बढ़ गई है। कच्चे माल की महंगाई के चलते कारोबार चलाना मुश्किल होता देख 'इंडियन होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन' (आहार) ने खाने-पीने की चीजों के दाम 10 से 15 फीसदी तक बढ़ाने के संकेत दिए हैं। संगठन के मुताबिक प्रबंधन खर्च में भारी बढ़ोतरी के बाद कीमतें बढ़ाने के सिवा कोई विकल्प नहीं बचा है।

इस संभावित मूल्यवृद्धि से मुंबईकरों की जेब पर सीधा असर पड़ेगा और आम जनता का बजट बिगड़ना तय है। 'आहार' ने भले ही 10 से 15 फीसदी बढ़ोतरी सुझाई हो, लेकिन कई होटल मालिक ग्राहकों पर अचानक इतना बोझ डालने के पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना है कि रोज आने वाले छात्रों और नौकरीपेशा लोगों का ध्यान रखते हुए वे बीच का रास्ता निकाल रहे हैं, ताकि कारोबार भी चले और जेब पर असर भी सीमित रहे। इसके तहत सिर्फ 5 से 8 फीसदी बढ़ोतरी पर विचार चल रहा है।

बिगड़ेगा मासिक बजट

मुंबई शहर में घर से दूर रहकर बाहर खाने पर निर्भर छात्रों और कामकाजी युवाओं पर इस महंगाई की सबसे तगड़ी मार पड़ेगी। सुबह की चाय से लेकर रात की थाली तक महंगी होने से उनका मासिक खर्च गड़बड़ा जाएगा। साथ ही वीकेंड पर परिवार सहित बाहर भोजन करने वाले मध्यम वर्ग का बजट भी प्रभावित होगा।

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अंतिम फैसला होटल संचालकों के हाथ

कमर्शियल गैस, किराया, बिजली बिल और कर्मचारियों के वेतन से होटलों की लागत काफी बढ़ गई है। हालांकि 'आहार' ने दाम बढ़ाने का सुझाव दिया है, लेकिन सभी जगह एक समान दरें लागू नहीं होंगी। कीमतें बढ़ानी हैं या नहीं और कितनी बढ़ानी है, इसका अंतिम फैसला स्थानीय होटल मालिकों पर ही निर्भर करेगा। अब देखना होगा कि नए मेन्यू में दरों में कितना बदलाव आता है।

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कच्चे माल के दाम बढ़ने के साथ-साथ होटलों के अन्य खर्चों में भी भारी इजाफा हुआ है। कर्मचारियों को साफ-सफाई और स्वच्छता का बेहतर प्रशिक्षण देना पड़ रहा है, जिसके चलते उनका वेतन भी बढ़ाना जरूरी हो गया है। इसके अलावा, बेहतर सफाई के लिए आधुनिक और बिजली से चलने वाले उपकरणों का इस्तेमाल भी अनिवार्य हो गया है। ऐसे में होटलों में यह संभावित मूल्यवृद्धि सिर्फ मुनाफा कमाने के लिए नहीं, बल्कि खाने की गुणवत्ता, साफ-सफाई और सेवाओं के उच्च स्तर को बरकरार रखने के लिए बेहद जरूरी है।

विजय के. शेट्टी, अध्यक्ष, इंडियन होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन

कच्चे माल के लगातार बढ़ते दामों के चलते हमने अपने रेस्टोरेंट में 10 फीसदी दरें बढ़ाई है। 'आहार कीमतें बढ़ाने का सुझाव जरूर देता है, लेकिन किसी पर दबाव नहीं डालता। दरें तय करना पूरी तरह होटल मालिक का अपना फैसला होता है। महंगाई से ग्राहकों पर असर पड़ना तय है, लेकिन मौजूदा समय में हमारी सबसे बड़ी चिंता खाद्य सुरक्षा प्रशासन के अव्यावहारिक नियम और बेवजह की कागजी औपचारिकताएं हैं। इन सब उलझनों और बढ़ती लागत के बीच आज ईमानदारी से होटल चलाना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है।

पृथ्वीराज शेट्टी, संचालक, प्रार्थना होटल

घर से दूर रहकर मुंबई में नौकरी करना पहले ही आसान नहीं है। दफ्तर के पास रोज के नाश्ते और थाली पर 10-15 फीसदी दाम बढ़े, तो महीने का खाने का बजट पूरी तरह बिगड़ जाएगा। वेतन सीमित है और रोजमर्रा का खर्च लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में समझ नहीं आता कि बचत कहां से करें।

किशोर जायसावल, नौकरीपेशा, गोवंडी

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