Mumbai GMLR Project: गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड पर मंडरा रहा है मौत का खतरा? नियमों की धज्जियां उड़ा रहे ठेकेदार
GMLR Project Mumbai: मुंबई के महत्वाकांक्षी GMLR प्रोजेक्ट में सुरक्षा मानकों की भारी अनदेखी का आरोप। भाजपा नगरसेविका प्रीति साटम ने बीएमसी प्रशासन को घेरा, बारिश से पहले हादसों की चेतावनी देते हुए का
- Written By: आकाश मसने
गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड (सोर्स: सोशल मीडिया)
Goregaon Mulund Link Road Safety News: मुंबई के पूर्वी और पश्चिमी उपनगरों को जोड़ने वाली महत्वाकांक्षी गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड (GMLR) परियोजना इस समय विवादों के घेरे में है। परियोजना का काम कर रहे ठेकेदारों पर सुरक्षा उपायों की घोर अनदेखी करने और नियमों के उल्लंघन के गंभीर आरोप लगे हैं।
भाजपा की नगरसेविका प्रीति साटम ने कहा कि गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड (GMLR) परियोजना के कार्य में सुरक्षा उपायों की अनदेखी की जा रही है। पुल पर गर्डर स्थापित करते समय कोई विशेष सावधानी नहीं बरती गई है, जबकि खुदाई के कारण जगह-जगह पानी जमा हो गया है। अब बारिश का मौसम आने में मात्र दो महीने बच्चे हैं, ऐसे में इस लिंक रोड पर यदि कोई दुर्घटना होती है, तो उसकी जिम्मेदारी नगर निगम प्रशासन की होगी या ठेकेदार की।
गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी
BMC की नगरसेविका प्रीति साटम ने आरोप लगाया कि सुरक्षा की अनदेखी के कारण नागरिकों की जान जोखिम में पड़ गई है। स्थायी समिति की बैठक में उन्होंने प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित किया। स्थायी समिति के अध्यक्ष प्रभाकर शिंदे ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए इसे लंबित रखा और प्रशासन से उचित कार्रवाई करने की अपेक्षा जताई। मुंबई मनपा द्वारा पूर्व और पश्चिम उपनगरों को वाली जोड़ने इस परियोजना के तहत गोरेगांव क्षेत्र में ठेकेदार द्वारा नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है और नगर निगम अधिकारी भी इसे नजरअंदाज कर रहे हैं। इसके चलते नागरिकों को भारी परेशानी और असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
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प्रीति साटम ने निर्देश दिया कि परियोजना का काम करते समय आम जनता को किसी प्रकार की दिक्कत न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाए। साथ ही ठेकेदारों की मदद करने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग भी उन्होंने की।
ईंधन की होगी बचत, सुधरेगी वायु की गुणवत्ता
इस परियोजना के पूरा होने पर गोरेगांव से मुलुंड तक का सफर 75 मिनट से घटकर लगभग 25 मिनट रह जाएगा। इससे ईंधन की बचत होगी और मुंबई के वायु गुणवत्ता सूचकांक में भी सुधार होगा। यह परियोजना चार चरणों में प्रस्तावित है, लेकिन निर्माण कार्य के दौरान स्थानीय नागरिकों और वाहन चालकों की सुरक्षा की अनदेखी की जा रही है। साटम ने स्पष्ट किया कि परियोजना का विरोध नहीं है, लेकिन काम के दौरान स्थानीय लोगों को हो रही परेशानियों को दूर करना आवश्यक है। उन्होंने प्रशासन से इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए उचित कदम उठाने की मांग की।
