Mumbai-Goa Highway: गडकरी की डेडलाइन फेल, 15 साल बाद भी अधूरा काम और मानसून की आहट से बढ़ी चिंता

Mumbai-Goa Highway के चौड़ीकरण का काम एक बार फिर अधूरा! नितिन गडकरी की 31 मई की डेडलाइन फेल होने से यात्रियों में भारी नाराजगी। 15 साल का इंतजार और अधूरे बायपास के बीच टोल वसूली ने बढ़ाया आक्रोश।
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सांकेतिक फोटो (सोर्स: डिजाइन फोटो)
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Mumbai-Goa Highway Widening Status: मुंबई-गोवा महामार्ग के चौड़ीकरण को लेकर एक बार फिर निराशाजनक तस्वीर सामने आई है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी द्वारा महामार्ग को पूरा करने के लिए दी गई 31 मई की डेडलाइन पूरी तरह विफल रही है। गडकरी ने आश्वासन दिया था कि इस साल के मानसून से पहले काम पूरा कर लिया जाएगा, लेकिन जून का महीना शुरू होने के बावजूद महामार्ग का काम कई जगहों पर अधूरा लटका हुआ है।

15 वर्षों का इंतजार और अधूरा बुनियादी ढांचा

इस महामार्ग के चौड़ीकरण का काम 2011 से, यानी पिछले 15 वर्षों से जारी है। इस लंबी अवधि के दौरान कई बड़े ठेकेदार और कंपनियां बदली गईं, लेकिन काम आज भी पूरा नहीं हो सका है। वर्तमान स्थिति यह है कि रायगड जिले में महामार्ग के 140 किलोमीटर के जाल में से केवल 70 प्रतिशत काम ही पूरा हो पाया है, जबकि 30 प्रतिशत काम अभी भी लंबित है।

मुख्य रूप से अधूरे काम

  • बायपास का अभाव: रायगड जिले के अत्यंत महत्वपूर्ण माणगांव और इंदापुर बायपास का काम अभी भी पूरा नहीं हुआ है। इन दोनों बायपास को मिलाकर लगभग 10 किलोमीटर का मुख्य सड़क कार्य शेष है।
  • फ्लाईओवर और सर्विस रोड: कोलाड के पास फ्लाईओवर का निर्माण बीच में ही रुका हुआ है। इसके अलावा, गांवों को जोड़ने वाली सर्विस रोड और आंतरिक सड़कें भी कई हिस्सों में अधूरी हैं।
  • दुर्घटनाओं का खतरा: कई क्षेत्रों में काम अधूरा होने के कारण एकतरफा (Single-lane) यातायात चल रहा है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं का जोखिम काफी बढ़ गया है।

टोल वसूली को लेकर गहराता आक्रोश

महामार्ग का काम पूरा न होने के बावजूद, राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग ने खारपाड़ा में पहला टोल नाका शुरू कर दिया है। स्थानीय नागरिकों और यात्रियों ने इसे प्रशासन के आशीर्वाद से होने वाली लूट करार दिया है। लोगों का कहना है कि जब सड़क ही तैयार नहीं है, तो टोल किस बात का लिया जा रहा है? स्थानीय विरोध के बावजूद प्रशासन ने इस टोल वसूली को बंद नहीं किया है।

मानसून की चिंता से परेशान नागरिक

अब जबकि जून का महीना शुरू हो चुका है और मानसून सिर पर है, कोंकण के निवासियों को डर है कि उन्हें एक बार फिर खस्ताहाल और गड्ढों वाली सड़कों से सफर करना पड़ेगा। निवासियों का आरोप है कि हर साल मानसून से पहले केवल आश्वासनों की खैरात बांटी जाती है, लेकिन धरातल पर कोई वास्तविक सुधार नहीं दिखता। स्थानीय लोग अब यह सवाल पूछ रहे हैं कि किस आधार पर 31 मई की समय सीमा तय की गई थी जब इतना काम बाकी था।

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