बच्ची के पेट से निकला बालों का गुच्छा (सोर्स: सोशल मीडिया)
Hairball In Stomach Surgery Mumbai: मुंबई से एक बेहद हैरान कर देने वाला मेडिकल मामला सामने आया है। यहां नारायणा हेल्थ एसआरसीसी चिल्ड्रन हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने एक 12 साल की बच्ची के पेट से बालों का एक विशाल गुच्छा (Hairball) निकालकर उसे नई जिंदगी दी है। यह गुच्छा बच्ची के पेट के लगभग 90 प्रतिशत हिस्से में फैल चुका था, जिसके कारण उसे खाने-पीने में भारी समस्या हो रही थी।
मुंबई में एक 12 साल की बच्ची के पेट में 90 प्रतिशत तक फैल चुके बालों के बड़े गुच्छे को जटिल ओपन सर्जरी कर निकालने में डॉक्टरों को सफलता मिली है। बताया गया कि 12 वर्ष की एक बच्ची को खाने पीने के तुरंत बाद उल्टी हो जाती थी। उसके अभिभावक ने कई डॉक्टरों को दिखाया। भूख एकदम कम हो जाने के बाद परिवार ने नारायणा हेल्थ एसआरसीसी चिल्ड्रन हॉस्पिटल के विशेषज्ञों से संपर्क किया।
अस्पताल की पीडियाट्रिक गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी और पीडियाट्रिक सर्जरी टीमों ने इस जटिल ऑपरेशन को अंजाम देकर बच्ची को पूरी तरह खतरे से मुक्त किया। नारायणा हेल्थ एसआरसीसी चिल्ड्रन हॉस्पिटल के पीडियाट्रिक गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी एवं हेपेटोलॉजी कंसल्टेंट डॉ. आदित्य कुलकर्णी के अनुसार क्लिनिकल जांच के दौरान सुकन्या (बदला हुआ नाम) के पेट के बाएं ऊपरी हिस्से में एक गांठ दिखाई दी। रक्त जांच के बाद किए गए सीटी स्कैन में पेट के भीतर एक बड़ा द्रव्यमान पाया गया, जो पेट की गुहा के 90 प्रतिशत से अधिक हिस्से में फैला हुआ था। ट्राइकोबेज़ोआर की संभावना देखते हुए अपर गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल एंडोस्कोपी की गई, जिसमें एक बड़ा हेयर बॉल दिखाई दिया, जो म्यूकस से ढका हुआ था और पेट से छोटी आंत के प्रारंभिक हिस्से तक फैला हुआ था।
पीडियाट्रिक सर्जरी टीम जिसका नेतृत्व डॉ. रसिकलाल शाह ने किया। एक ही सत्र में लगातार 3 घन्टे तक सर्जरी कर उस 39 किलो वजन की बच्ची के पेट से लगभग 16 x 14 सेंटीमीटर आकार का एक बड़ा हेयर बॉल सुरक्षित रूप से बाहर निकाला गया। निकाले गए द्रव्यमान को प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा गया, जहां पुष्टि हुई कि बाल, खाद्य कणों और म्यूकस से बना ट्राइकोबेज़ोआर था। संयोग से इसमें किसी प्रकार की कैंसरजनक (मैलिग्नेंसी) के संकेत नहीं थे। ऑपरेशन के बाद बच्ची को पीडियाट्रिक वार्ड में निगरानी में रखा गया। तीसरे दिन उसे पानी देना शुरू किया गया, जिसके बाद धीरे-धीरे सॉफ्ट डाइट दी गई। अब वह पूरी तरह स्वस्थ्य है।
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इस मामले में जानकारी देते हुए डॉ. आदित्य कुलकर्णी ने कहा कि मानव बाल पचने योग्य नहीं होते। जब इन्हें लंबे समय तक निगला जाता है, तो ये पेट में जमा होकर ठोस द्रव्यमान बना लेते हैं। इस मामले में ट्राइकोबेज़ोआर संभवतः 3 से 4 वर्षों में धीरे-धीरे विकसित हुआ था। बच्चों में लगातार पेट भरा रहने का एहसास और बार-बार उल्टी को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। डॉ. रसिकलाल शाह ने कहा कि बड़े ट्राइकोबेज़ोआर को एंडोस्कोपी से निकालना मुश्किल होता है और इसके लिए एक तरह से जटिल ओपन सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है।