मानव तस्करी पर DGP सदानंद दाते का बड़ा बयान, पूरे नेटवर्क को खत्म करने के लिए हो बैकवर्ड-फॉरवर्ड जांच

Mumbai Police News: महाराष्ट्र के डीजीपी सदानंद दाते ने 'न्यायसेतु 2026' कार्यशाला में कहा कि मानव तस्करी के पूरे नेटवर्क को खत्म करने के लिए पुलिस को 'बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज' की जांच करनी होगी।
DGP Sadanand Date’s major statement on human trafficking
महाराष्ट्र डीजीपी सदानंद दाते निर्देश फोटो सोर्स- आईएएनएस
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Highlights

  • डीजीपी सदानंद दाते ने मानव तस्करी नेटवर्क पर कार्रवाई के निर्देश दिए।

  • पुलिस जांच में बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज की पहचान पर जोर।

  • पीड़ितों को सुरक्षा, मेडिकल सहायता और मनोवैज्ञानिक परामर्श देने की अपील।

Maharashtra DGP Sadanand Date Human Trafficking: मानव तस्करी जैसे गंभीर अपराधों की जांच केवल आरोपी की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसके पीछे सक्रिय पूरे नेटवर्क की पहचान कर उसे खत्म करने पर ध्यान देना चाहिए।

महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) सदानंद दाते ने यह बात मुंबई स्थित डीजीपी कार्यालय के दरबार हॉल में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला ‘न्यायसेतु 2026’ में कही।

महाराष्ट्र पुलिस बल और प्रकृति संस्था के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला में मानव तस्करी के मामलों की प्रभावी जांच, पीड़ितों की सुरक्षा और बदलती तकनीक के इस्तेमाल पर चर्चा हुई।

नेटवर्क-केंद्रित जांच पर जोर

डीजीपी सदानंद दाते ने कहा कि मानव तस्करी के मामलों में पुलिस को अपराध के पीछे सक्रिय पूरे तंत्र की पहचान करनी चाहिए। इसके लिए ‘बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज’ की जांच जरूरी है। इससे अपराध से जुड़े लोगों, वित्तीय लेनदेन और अन्य संभावित कड़ियों का पता लगाने में मदद मिल सकती है।

उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और आधुनिक तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ अपराध का स्वरूप भी बदल रहा है। ऐसे में पुलिस अधिकारियों को तकनीकी बदलावों के प्रति सतर्क रहना होगा और जांच के तरीकों को समय के अनुसार विकसित करना होगा।

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पीड़ितों की सुरक्षा और सहायता जरूरी

डीजीपी सदानंद दाते ने जांच के दौरान पीड़ितों की परिस्थितियों और संवेदनाओं को समझने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस की भूमिका केवल कानून लागू करने तक सीमित नहीं है। पीड़ितों को पहचान की सुरक्षा, जरूरत पड़ने पर बंद कमरे में सुनवाई, चिकित्सा सहायता, भाषा अनुवादक और मनोवैज्ञानिक परामर्श जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने में भी पुलिस को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए।

उन्होंने विशेष एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट्स के प्रभावी प्रशिक्षण और पुलिसकर्मियों के कौशल विकास को जरूरी बताया, ताकि ऐसे मामलों में जांच और पीड़ित सहायता की प्रक्रिया बेहतर हो सके।

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नए कानूनों और तकनीकी पहलुओं पर प्रशिक्षण

कार्यशाला की प्रस्तावना में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (महिला एवं बाल अपराध रोकथाम) अश्वती दोरजे ने बताया कि इसका उद्देश्य अधिकारियों को मानव तस्करी में इस्तेमाल होने वाले वित्तीय लेनदेन और आधुनिक तकनीक की जानकारी देना है।

कार्यक्रम में अधिकारियों को नए कानूनी प्रावधानों, संवैधानिक नियमों और अदालती फैसलों से भी अवगत कराया गया। मंच पर पूर्व डीजीपी डॉ. पी. एम. नायर, महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की सदस्य सचिव नंदिनी आओडे और विशेष पुलिस महानिरीक्षक शारदा राउत उपस्थित थीं। कार्यक्रम का संचालन सेवानिवृत्त पुलिस उप अधीक्षक मदन पाटिल ने किया। कार्यशाला में कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए।

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