Mumbai में साइबर ठगी के नए तरीके, वीडियो कॉल और फर्जी ऐप से बुजुर्गों को बनाया निशाना

Mumbai में साइबर ठगी के मामलों ने नया रूप ले लिया है, जहां ठग अब ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर लोगों को डराकर घर तक पहुंचकर नकदी वसूल रहे हैं और फर्जी ऐप से बैंक खाते खाली कर रहे हैं।
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मुंबई में साइबर क्राइम (सौजन्य-सोशल मीडिया)
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Mumbai Cyber Fraud Digital Arrest Scam: मुंबई में साइबर अपराधियों के हौसले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। ‘डिजिटल अरेस्ट’ और ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों ने अब नया और खतरनाक रूप ले लिया है, जिससे पुलिस की चिंता भी बढ़ गई है।

पश्चिमी उपनगर में रहने वाली 58 वर्षीय विधवा महिला को ठगों ने अपना शिकार बनाया। जालसाजों ने वीडियो कॉल के जरिए खुद को दिल्ली पुलिस का अधिकारी बताया और महिला को डराया कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग में हुआ है।

Mumbai में घर पहुंचकर की गई नकदी वसूली

इस मामले की सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि ठगों ने केवल ऑनलाइन ट्रांसफर पर ही भरोसा नहीं किया। उन्होंने अपने एजेंटों को महिला के घर के पास भेजकर दो बार व्यक्तिगत रूप से नकदी वसूली की, जिससे कुल 60 लाख रुपये ऐंठ लिए गए।

फर्जी ऐप से बैंक खाता खाली

दूसरा मामला मुलुंड (पश्चिम) की एक 73 वर्षीय वरिष्ठ वकील से जुड़ा है। उन्हें गैस कनेक्शन बंद होने की धमकी वाला एक फर्जी संदेश मिला। बिल अपडेट करने के बहाने उनसे एक संदिग्ध APK ऐप डाउनलोड करवाया गया, जिसके जरिए ठगों ने उनके फोन का डेटा एक्सेस कर लिया और बैंक खाते से 3.5 लाख रुपये निकाल लिए।

बुजुर्ग बन रहे आसान निशाना

इन घटनाओं से साफ है कि साइबर अपराधी अब खासतौर पर बुजुर्गों और भावनात्मक रूप से कमजोर लोगों को निशाना बना रहे हैं। डर और भ्रम पैदा कर उन्हें जाल में फंसाया जा रहा है।

पुलिस के सामने नई चुनौती

Mumbai Police के लिए यह एक नई चुनौती बनती जा रही है। लगातार जागरूकता अभियानों के बावजूद ऐसे मामलों में कमी नहीं आ रही है।

सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी अनजान कॉल, लिंक या ऐप पर भरोसा न करें। सरकारी अधिकारी कभी भी वीडियो कॉल पर पैसे नहीं मांगते। सतर्कता और जागरूकता ही ऐसे साइबर अपराधों से बचने का सबसे प्रभावी उपाय है।

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