Bombay High Court समिति की रिपोर्ट, मुंबई में वाहन प्रदूषण पर सख्त कदमों की सिफारिश

मुंबई में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर Bombay High Court समिति ने वाहन उत्सर्जन पर चिंता जताते हुए बस लेन, बैरियर-फ्री टोलिंग और फर्जी PUC केंद्रों पर सख्त कार्रवाई की सिफारिश की है।
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बॉम्बे हाई कोर्ट (फोटो सोर्स - गूगल इमेज)
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Bombay High Court Report On Mumbai Air Pollution: बॉम्बे हाई कोर्ट की तरफ से वायु प्रदूषण नियंत्रण निर्देशों के पालन की निगरानी के लिए नियुक्त दो पूर्व न्यायाधीशों की उच्च-स्तरीय समिति ने अपनी हालिया प्रारंभिक रिपोर्ट में वाहन उत्सर्जन को लेकर चिंता जताई है।

समिति ने ट्रैफिक विभाग को निर्देश दिया है कि वह व्यापक सड़कों पर समर्पित बस लेन शुरू करने जैसे कदम उठाए, ताकि किसी बस के खराब होने की स्थिति में पूरे ट्रैफिक पर कम असर पड़े। इसके अलावा, ऐसी गाड़ियों की नियमित निवारक देखभाल (प्रिवेंटिव मेंटेनेंस) की व्यवस्था की जाए, ताकि यांत्रिक खराबी से बचा जा सके और मुंबई व आसपास के क्षेत्रों में बैरियर-फ्री टोलिंग लागू की जाए।

समिति ने यह भी कहा कि BMC की मुंबई वायु प्रदूषण शमन योजना को सभी नियोजन प्राधिकरणों और स्थानीय निकायों पर समान रूप से लागू किया जाना चाहिए, ताकि उनके द्वारा किए जा रहे निर्माण कार्य, विशेष रूप से सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परियोजनाएं, बिना नियमन के न रहें।

Bombay High Court की चल रही सुनवाई

यह रिपोर्ट पिछले महीने Bombay High Court के मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम ए अंकहाड की पीठ के समक्ष प्रस्तुत की गई थी, जो मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) में गिरती वायु गुणवत्ता को लेकर स्वतः संज्ञान जनहित याचिका की सुनवाई कर रही है। फरवरी की इस प्रारंभिक रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष हाल ही में संबंधित पक्षों को उपलब्ध कराए गए।

पीयूसी प्रमाण पत्र जारी करना एक गंभीर समस्या

रिपोर्ट में बताया गया है कि एमएमआर में वायु प्रदूषण के मुख्य स्रोत वाहन उत्सर्जन, निर्माण न और तोड़फोड़ गतिविधियां, औद्योगिक उत्सर्जन, सड़क किनारे की धूल, कचरे का खुले में जलाना और खाना पकाने से होने वाला धुआं हैं। आरटीओ अधिकारियों द्वारा प्रदूषण नियंत्रण (पीयूसी) अभियान चलाने की जानकारी पर समिति ने कहा कि भारी यातायात के मुकाबले नियम तोड़ने वालों की पहचान बहुत कम हो रही है।

समिति ने चेतावनी दी कि बिना जांच किए पीयूसी प्रमाणपत्र जारी करना एक गंभीर समस्या है, क्योंकि इससे प्रदूषण फैलाने वाले वाहन नियमों से बच जाते हैं। इस पर फर्जी केंद्रों के खिलाफ विशेष अभियान चलाने और उनके लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश की गई। समिति ने ट्रैफिक सिग्नलों के बेहतर समन्वय के लिए गूगल मैप्स के उपयोग का सुझाव दिया और अटल सेतु मॉडल के आधार पर समयबद्ध बैरियर-फ्री टोलिंग लागू करने को कहा।

समिति की ओर से जारी प्रमुख निर्देश

  • चौड़ी सड़कों पर समर्पित बस लेन
  • सार्वजनिक परिवहन बसों की नियमित मेंटेनेस
  • फर्जी पीयूसी केंद्रों पर सख्त कार्रवाई
  • ट्रैफिक सिग्नल समन्वय के लिए गूगल मैप्स का उपयोग
  • अटल सेतु मॉडल पर बैरियर-फ्री टोलिंग
  • रणनीतिक स्थानों पर टोइंग वैन और आपातकालीन टीमे
  • गड्ढों और ट्रैफिक हॉटस्पॉट की संयुक्त जांच
  • सड़क किनारे पार्किंग का स्पष्ट चिन्हांकन और सख्त जुर्माना
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