क्लस्टर रिडेवलपमेंट मॉडल से बदलेगी मुंबई की तस्वीर, 9,115 करोड़ के राजस्व का अनुमान
Mumbai Cluster Redevelopment Projects: मुंबई में पुराने आवासीय ढांचों के पुनर्विकास को नई गति मिली है। पहले 90 दिनों में 70 डेवलपर समझौते हुए हैं, जिससे 2031 तक 59 हजार नए घर मिलने की संभावना है।
- Written By: अपूर्वा नायक
मुंबई क्लस्टर रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स (सौ. सोशल मीडिया )
Mumbai Cluster Redevelopment Projects News: पुराने होते आवासीय ढांचे और सीमित भूमि उपलब्धता के बीच मुंबई अब क्लस्टर आधारित पुनर्विकास मॉडल के जरिए अपने शहरी स्वरूप को बदलने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। वर्ष 2026 के पहले 90 दिनों में ही 70 डेवलपर समझौते होने से पुनर्विकास क्षेत्र में नई गति देखने को मिली है।
एक अध्ययन के अनुसार वर्ष 2031 तक पुनर्विकास परियोजनाओं से लगभग 59,000 नए घरों का निर्माण संभव है, जबकि इससे राज्य को 9,115 करोड़ रुपए का स्टांप शुल्क राजस्व प्राप्त हो सकता है।
432 एकड़ भूमि का नया उपयोग
- बोरीवली क्षेत्र 220 परियोजनाओं के साथ शहर का सबसे बड़ा पुनर्विकास हॉटस्पॉट बनकर उभरा है, जो मुंबई के भविष्य के आवासीय विकास की नई धुरी बनता दिखाई दे रहा है। मुंबई में वर्तमान में 1,094 हाउसिंग सोसायटियां पुनर्विकास प्रक्रिया में शामिल है, जिससे लगभग 432 एकड़ भूमि का नया उपयोग संभव होगा।
- रिपोर्ट के अनुसार 15 मार्च तक 52.2 एकड़ क्षेत्र में फैली 70 सोसायटियां पुनर्विकास के दायरे में आ चुकी थीं। इससे संकेत मिलता है कि डेवलपर्स की रुचि लगातार बनी हुई है और भविष्य की आवासीय आपूर्ति में पुनर्विकास की भूमिका तेजी से बढ़ रही है।
- बीएमसी की 2017 की ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक मुंबई में 30 वर्ष से अधिक पुरानी करीब 1.6 लाख इमारते हैं, जिन्हें संरचनात्मक ऑडिट के लिए चिन्हित किया गया है। इनमें 46 प्रतिशत इमारतें पश्चिम उपनगर, 28 प्रतिशत दक्षिण मुंबई और 26 प्रतिशत पूर्व उपनगर में स्थित हैं। ऐसे में पुनर्विकास शहर की आवासीय जरूरतों को पूरा करने का प्रमुख माध्यम बनता जा रहा है।
भूमि की कमी और पुराने आवासीय ढांचे को देखते हुए मुंबई के दीर्घकालिक विकास में पुनर्विकास की भूमिका और महत्वपूर्ण होती जाएगी।
– शिशिर बैजल, अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक, नाइट फ्रैंक इंडिया
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संगठित मॉडल की ओर बढ़ रही मुंबई
डीसीपीआर-2034 और स्व-पुनर्विकास नीति जैसे सुधारों – के बाद बड़े भूखंडों पर परियोजनाओं को भी गति मिली है। वर्ष 2026 में 10,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले भूखंड कुल पुनर्विकास क्षेत्र के आधे से ज्यादा हिस्से का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि मुंबई में पुनर्विकास इमारत स्तर से आगे बढ़कर क्लस्टर आधारित और अधिक संगठित मॉडल की ओर बढ़ रही हैं।
