BMC Sadan Walkout पर सख्ती की तैयारी, नियमों के तहत कार्रवाई करेगी महायुति
BMC Sadan Walkout Row Rule: मुंबई मनपा सभागृह में बढ़ते वॉकआउट पर सत्ताधारी महायुति सख्ती के मूड में है। नियमों के तहत कार्रवाई की तैयारी से सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव और तेज होने के संकेत हैं।
- Written By: अपूर्वा नायक
मुंबई महानगरपालिका (सोर्स: सोशल मीडिया)
Mumbai BMC Sadan Walkout Row Rule: मुंबई मनपा के सभागृह में बार-बार हो रहे वॉकआउट को लेकर सत्ताधारी महायुति अब सख्ती के मूड में नजर आ रही है।
सूत्रों के अनुसार, विपक्ष के लगातार सभा त्याग से नाराज सत्तापक्ष अब मनपा अधिनियम के नियमों का सहारा लेकर जवाबी कार्रवाई की रणनीति बना रहा है।
इससे आने वाले दिनों में सत्ता और विपक्ष के बीच तनातनी और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। मनपा के नए कार्यकाल की शुरुआत से ही विपक्ष विभिन्न मुद्दों पर विरोध दर्ज कराने के लिए सदन से बाहर निकलता रहा है। हालांकि, हाल के समय में वॉकआउट की घटनाओं में तेजी आई है, जिससे सदन की कार्यवाही प्रभावित हो रही है। इसी स्थिति को देखते हुए सत्ताधारी खेमे ने अब नियमों के सख्त इस्तेमाल की तैयारी शुरू कर दी है।
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नियमों की हो रही है अब समीक्षा
मनपा अधिनियम में सदस्यों के आचरण को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं। महापौर रितु तावड़े को यह अधिकार है कि वे अनुशासनहीनता की स्थिति में किसी सदस्य को सदन से बाहर जाने का आदेश दे सकते हैं। यदि वही सदस्य 15 दिनों के भीतर दोबारा ऐसा करता है, तो उसे 15 दिनों के लिए निलंबित किया जा सकता है।
हालांकि, यह निलंबन अधिकतम तीन बैठको तक ही प्रभावी रहेगा। नियमों के तहत, यदि निलंबित सदस्य अपनी गलती स्वीकार कर माफी मांगता है और महापौर संतुष्ट होते हैं, तो निलंबन वापस लिया जा सकता है। निलंबन का प्रभाव केवल सभागृह की बैठकों तक ही सीमित रहेगा।
विपक्ष के नगरसेवक भड़के
संबंधित सदस्य समितियों में अपनी भूमिका जारी रख सकेगा। महापौर रितु तावड़े का कहना है कि बार-बार वॉकआउट के कारण अन्य सदस्यों को अपनी बात रखने का मौका नहीं मिल पाता, इसलिए नियमों की समीक्षा की जा रही है। इस बीच, विपक्षी नेताओं ने सत्तापक्ष के इस रुख पर कड़ी आपत्ति जताई है।
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विपक्ष की नेता किशोरी पेडणेकर ने इसे “तानाशाही” करार देते हुए कहा कि यदि किसी सदस्य के साथ अन्याय हुआ तो सड़कों पर भी विरोध होगा। कांग्रेस के अशरफ आजमी ने आरोप लगाया कि यह कदम विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। एमआईएम के जमीर कुरैशी ने भी इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया।
मुंबई से नवभारत लाइव के लिए ब्रिजेश पाठक की रिपोर्ट
