कॉन्सेप्ट फोटो (सोर्स: सोशल मीडिया)
BMC Officers Salary Cut: देश आर्थिक राजधानी में अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई में लापरवाही बरतने पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने बीएमसी प्रशासन को कड़ा सबक सिखाया है। मुंबई में अवैध निर्माण पर कार्रवाई नहीं करने पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने बीएमसी के दो वरिष्ठ अधिकारियों के वेतन से 11-11 रुपये काटने के आदेश दिए थे, जिसके बाद बीएमसी के वरिष्ठ अधिकारियों ने ए वार्ड के सहायक आयुक्त जयदीप मोरे पर विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। बता दें कि हाल ही में हाई कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि अवैध निर्माण के खिलाफ समय पर कार्रवाई नहीं की गई।
अदालत के आदेशों की अवहेलना मानते हुए कोर्ट ने बीएमसी की अतिरिक्त आयुक्त (शहर) अश्विनी जोशी और उपायुक्त- (जोन-1) चंदा जाधव पर 11-11 रुपये का प्रतीकात्मक जुर्माना लगाया। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए कि यह राशि दोनों अधिकारियों के वेतन खाते से काटकर कीर्तिकर लॉ लाइब्रेरी में जमा की जाए। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यह जुर्माना बीएमसी प्रशासन को यह संदेश देने के लिए है कि न्यायालय के हर आदेश का तत्काल और प्रभावी पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने यह भी माना कि मामले में लापरवाही ने अवैध निर्माण को बढ़ावा दिया। दरअसल, यह विवाद अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई से जुड़ा है, जिसमें बीएमसी के ए वॉर्ड स्तर पर जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठे। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि सहायक आयुक्त जयदीप मोरे ने मामले में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई। इस पर 24 दिसंबर 2025 को कोर्ट ने मोरे के खिलाफ उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। यह आदेश ग्रीन ट्वाइन एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड की याचिका पर सुनवाई के बाद पारित किया गया।
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हाई कोर्ट के आदेश के अनुपालन में जयदीप मोरे के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कार्रवाई में देरी क्यों हुई और क्या इसमें किसी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार शामिल था। इसके लिए एक विशेष जांच टीम गठित की गई है, जो पूरे मामले की शुरुआत से अंत तक पड़ताल करेगी। दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में जयदीप मोरे से संपर्क करने का प्रयास किया गया।