31 साल बाद निवेशक को मिला न्याय, बॉम्बे हाईकोर्ट ने कोटक महिंद्रा बैंक को दिए शेयर ट्रांसफर के आदेश
Bombay High Court Kotak Share Transfer: निवेशक रमेश सनाथरा को 31 साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने कोटक महिंद्रा बैंक को शेयर ट्रांसफर का निर्देश दिया है।
- Written By: अपूर्वा नायक
बॉम्बे हाई कोर्ट (सोर्स: सोशल मीडिया)
Bombay High Court Kotak Share Transfer News: शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए एक मिसाल बन चुके मामले में मुंबई के एक निवेशक को 31 साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार न्याय मिल गया।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने निवेशक रमेश सनाथरा के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कोटक महिंद्रा बैंक को उनके नाम पर शेयर ट्रांसफर करने और सभी कॉर्पोरेट लाभ देने का निर्देश दिया है।
जानकारी के अनुसार रमेश सनाथरा ने वर्ष 1994 में कोटक महिंद्रा फाइनेंस के 100 शेयर खरीदे थे। उस समय कंपनी बैंक नहीं बनी थी। शेयर खरीदने के बाद ट्रांसफर प्रक्रिया के दौरान मूल शेयर सर्टिफिकेट गायब हो गए।
सम्बंधित ख़बरें
क्या पार्थ पवार बनेंगे केंद्रीय मंत्री? मंत्रिमंडल विस्तार से पहले मोदी सरकार से सुनेत्रा के NCP की बड़ी मांग
किसानों के लिए बड़ी खबर: नकली बीज-खाद की शिकायत पर 7 दिन में एक्शन, महाराष्ट्र सरकार ने बदला नियम
खेत की जुताई की कीमत महिला की इज्जत! ट्रैक्टर मालिक और 3 ने किसान की पत्नी का बारी बारी से किया रेप
पुणे में नहर तोड़कर पानी चोरी का मामला, साइफन पाइपलाइन से अवैध जल दोहन, केस दर्ज
शेयरों के ट्रांसफर पर रोक लगाने की मांग
इसके बाद उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और शेयरों के ट्रांसफर पर रोक लगाने की मांग की। मामला बाद में अदालत तक पहुंच गया। इस दौरान कंपनी में कई बार बोनस शेयर और स्टॉक संप्लिट हुए।
इसी कारण शुरुआती 100 शेयर बढ़कर करीब 5,000 शेयरों में बदल गए। बताया जा रहा है कि उस समय लगभग 39,700 रुपये के निवेश की मौजूदा कीमत करीब 19 लाख रुपये तक पहुंच चुकी है।
ये भी पढ़ें :- सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, टीटीसी एमआईडीसी में प्रॉपर्टी टैक्स वसूलेगी सिर्फ नवी मुंबई मनपा
कई पुराने दस्तावेज बाढ़ में हो गए थे नष्ट
- मामले की सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि 2005 की मुंबई बाढ़ में कई पुराने दस्तावेज नष्ट हो गए थे, जिससे केस और जटिल हो गया।
- बावजूद इसके निवेशक ने कानूनी लड़ाई जारी रखी। वर्ष 2018 में सिविल कोर्ट ने उन्हें शेयरों का वैध मालिक माना था। अब हाईकोर्ट के अंतिम फैसले के बाद उन्हें अपने शेयर और उससे जुड़े सभी लाभ मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
- इस फैसले को निवेशकों के अधिकारों और धैर्य की बड़ी जीत माना जा रहा है।
