Mumbai की मिनी विधानसभा में सियासी संग्राम, हिंदी बनाम मराठी राजनीति तेज
Maharashtra Local Body Election: बीएमसी चुनाव से पहले बीजेपी ने हिंदी भाषी वोट बैंक पर फोकस बढ़ा दिया है। 227 सीटों में 137 पर चुनाव लड़ते हुए पार्टी ने 21 हिंदी भाषी उम्मीदवार उतारे हैं।
- Written By: अपूर्वा नायक
मुंबई न्यूज (सौ. सोशल मीडिया )
Mumbai News In Hindi: मुंबई सहित राज्य की 29 महानगरपालिकाओं के मतदान का काउंटडाउन शुरू हो गया है। शनिवार को राज्य चुनाव आयोग सभी 29 महानगरपालिकाओं के विभिन्न वार्डों से चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों की अधिकृत घोषणा कर देगा।
इसी के साथ धुआंधार चुनाव प्रचार का दौर शुरू हो जाएगा। इस बीच पूरे देश की नजरें राज्य की मिनी विधानसभा कही जाने वाली मुंबई महानगर पालिका के चुनावों पर लगी हैं, पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और उनके चचेरे भाई राज ठाकरे का विरोधी गठबंधन जहां इस चुनाव में हिंदी भाषी बनाम-मराठी भाषी बनाने का प्रयास कर रहा है, वहीं राज्य की प्रमुख सत्तारूढ़ और सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी ने हिंदी भाषी वोट बैंक पर विशेष रूप से अपना ध्यान केंद्रीय किया है।
एक अनुमान के अनुसार, मुंबई में लगभग 18 लाख हिंदी भाषी वोटर हैं। कभी मुंबई के हिंदी भाषी कांग्रेस का परंपरागत बोट बैंक हुआ करते थे। लेकिन वर्ष 2014 के बाद यह वोट बैंक बीजेपी के पाले में खिसक गया।
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इसी की बदौलत 2014 विधानसभा चुनाव में मुंबई में बीजेपी के रिकॉर्ड 15 विधायक चुनाव जीतने में सफल हुए थे। अब बीएमसी चुनाव में उसी सिलसिले को बरकरार रखते हुए मुंबई महानगर पालिका में अपना महापौर बैठाने का प्रयास बीजेपी के रणनीतिकार कर रहे। इसलिए मुंबई की 227 सीटों में 137 सीटों पर चुनाव लड़ रही बीजेपी ने 21 हिंदी भाषियों को अपना उम्मीदवार बनाया है।
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इनका पत्ता कटा
- गोरेगांव से नगरसेवक रहे दीपक ठाकुर की सीट ओबीसी होने के कारण ये चुनाव से वंचित रह गए। फालीना से चुनाव लड़ने की इच्छा रखने वाले नीतीश सिंह भी उम्मीदवारी हासिल नहीं कर पाए, क्योंकि 2017 में क्षेत्र से मनसे का उम्मीदवार चुनाव जीता या, जो कि फिलहाल पाला बदल का उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ जा चुका है। इसलिए सीट शिंदे सेना को चली गई, वार्ड 89 में अंतर्कलह टालने के लिए बीजेपी ने सीट शिंदे युट के लिए छोड़ दी।
- यहां से अमरजीत सिंह और अजय सिंह के बीच रस्साकशी चल रही थी। दोनों के झगड़े में पार्टी ने सीट शिंदे सेना को दे दी, पार्टी के एक अन्य पदाधिकारी पंकज यादव को टिकट नहीं मिला, क्योंकि उनका वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित हो गया। अब उनकी पत्नी चुनाव लड़ रही है। सुनीता यादव और सागर सिंह का टिकट स्थानीय विधायक अतुल भातखलकर के विरोध के कारण कट गया। बताया जा रहा है कि केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल भी सागर की उम्मीदवारी के खिलाफ थे। कांदिवली से सिटिंग कार्यरिटर कमलेश यादव का वार्ड महिला हो जाने के कारण उनकी बेटी चुनाव लड़ रही है।
