Mumbai BMC AI Desilting: बाढ़ से निपटने के लिए BMC का AI दांव, डी-सिल्टिंग में फर्जीवाड़ा पकड़ने की नई तकनीक

BMC AI Desilting: मुंबई में मानसून से पहले BMC ने बाढ़ से निपटने की तैयारियां तेज कर दी हैं। अब डी-सिल्टिंग कार्य में पारदर्शिता लाने और फर्जीवाड़ा रोकने के लिए AI तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।
mumbai-bmc-ai-desilting-flood-preparedness-monsoon-plan
मुंबई BMC AI डिसिल्टिंग प्रोजेक्ट (सौ. सोशल मीडिया )
Published on
Updated on

Mumbai BMC AI Desilting Flood Preparedness Plan: मानसून के आगमन में 60 दिन से भी कम समय शेष होने के बीच बीएमसी ने मुंबई में बाढ़ से निपटने के लिए अपनी वार्षिक तैयारियों को तेज कर दिया है।

हालांकि, डिवॉटरिंग पंप लगाने और संभावित बाढ़ क्षेत्रों में हस्तक्षेप करने के अलावा, मनपा ने डी-सिल्टिंग (गाद निकालने) कार्यों पर नजर रखने और धोखाधड़ी को पकड़ने के लिए अपना स्वयं का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) मॉडल भी विकसित किया है।

गाद लोड करते समय धूल नहीं उड़ती, जबकि कचरा मिलाने पर धूल दिखाई देती है। एआई ऐसे संकेतों को भी पहचानकर अलर्ट जारी करता है, जिसके बाद ठेकेदारों को बुलाया जाता है और उन्हें वार्निंग दी जाती है।

डी-सिल्टिंग वह प्रक्रिया है, जिसमें नदियों और नालों सहित जल निकायों के तल में जमा गाद, कीचड़ को हटाया जाता है। गाद पानी के प्रवाह को धीमा कर देती हैं, जिससे भारी बारिश के दौरान पानी का बहाव रुकता है और शहर में जलभराव की स्थिति पैदा होती है।

डी-सिल्टिंग कार्य के लिए बीएमसी निजी ठेकेदारों को नियुक्त करती है, जो हटाई गई गाद की मात्रा के आधार पर भुगतान लेते हैं, इसलिए ठेकेदारों द्वारा मात्रा बढ़ाने के लिए अपनाए जाने वाले फर्जी तरीकों को रोकने के लिए बीएमसी एआई मॉडल पर काफी हद तक निर्भर है।

BMC AI Desilting अनिवार्य

पिछले वर्ष से बीएमसी ने अनिवार्य किया है कि ठेकेदार डी-सिल्टिंग की पूरी प्रक्रिया गाद निकालने से लेकर ट्रकों में लोड करने और निस्तारण स्थल तक पहुंचाने तक का वीडियो रिकॉर्ड करें। इन वीडियो को बीएमसी पोर्टल पर अपलोड किया जाता है, जहां एआई द्वारा उनकी जांच की जाती है। बीएमसी के अतिरिक्त मनपा आयुक्त अभिजीत बांगर के अनुसार, एआई मॉडल वीडियो स्कैन कर विसंगतियों को चिन्हित करता है।

गाद में कचरा मिलाया तो एआई करेगी पहचान

उदाहरण के लिए, यदि किसी वीडियो में ट्रक को 2 मिनट से कम समय में लोड करते हुए दिखाया गया है, तो उसे संदिग्ध माना जाता है, क्योंकि सामान्यतः इसमें 7-8 मिनट लगते हैं। उन्होंने बताया कि कुछ ठेकेदार गाद की मात्रा बढ़ाने के लिए उसमें कचरा मिलाते हैं, जिससे ट्रक जल्दी भर जाता है।

एआई मॉडल इस पैटर्न को पहचानकर ऐसे मामलों को आसानी से पकड़ लेता है। कई बार ठेकेदार पुराने वीडियो को कॉपी करके अपलोड करते हैं। वीडियो की गुणवत्ता या रिजॉल्यूशन में बदलाव एआई द्वारा तुरंत पकड़ लिया जाता है। इस वर्ष बीएमसी ने प्री-मानसून डी-सिल्टिंग का लक्ष्य घटाकर 8।47 लाख मीट्रिक टन कर दिया है, जो पिछले वर्ष 12।03 लाख मीट्रिक टन था।

पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया कदम

  • अधिकारियों के अनुसार, यह कदम पारदर्शिता सुनिश्चित करने और केवल वास्तविक गाद हटाने पर ही भुगतान करने के लिए उठाया गया है। इस वर्ष मुबई के विभिन्न निचले इलाकों में 547 डिवॉटरिंग पंप लगाए जाएंगे, जो पिछले तीन वर्षों में सबसे अधिक संख्या है।
  • 14 वाहन-आधारित मोबाइल पंपिग यूनिट भी तैनात की जाएंगी, जो संकरी गलियों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में भी आसानी से पहुंचकर पानी निकाल सकेंगी। इन यूनिट्स को चार साल के लिए 8।8 करोड़ रुपये की लागत पर लीज पर लिया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि कई क्षेत्रों में मध्यम या भारी बारिश के दौरान भी जलभराव होता है।
  • औसतन, मुंबई में हर साल लगभग 16 दिन ऐसे होते हैं जब दैनिक वर्षा 100 मिमी से अधिक होती है। बीएमसी अधिकारियों ने बताया कि मेट्रो, सड़क और पुल परियोजनाओं जैसे निर्माण कार्यों के कारण कई वार्डों में बाढ़ स्थल बढ़ गए हैं, जिसके चलते अधिक पंपों की आवश्यकता महसूस हो रही है।
Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com