मुंबई में ऐप-आधारित कैब-ऑटो ड्राइवरों की हड़ताल, ओला-उबर सेवाएं प्रभावित, यात्रियों की बढ़ी परेशानी
App Based Cab और ऑटो ड्राइवरों की एक दिन की हड़ताल से मुंबई और एमएमआर में यात्रा प्रभावित हो सकती है। यूनियनों ने न्यूनतम किराया में बदलाव की मांग करते हुए केंद्र सरकार से हस्तक्षेप मांगा है।
- Written By: अपूर्वा नायक
ऐप बेस्ड टैक्सी सर्विस (सौ. सोशल मीडिया )
Ola Uber Services Disruption: आज मुंबई और महानगर क्षेत्र में ऐप-आधारित कैब और ऑटो बुक करना मुश्किल हो सकता है। ऐप आधारित परिवहन श्रमिकों का भारतीय संघ के आह्वान पर देशभर के ड्राइवर ‘ऑल इंडिया ब्रेकडाउन’ के तहत एक दिन की हड़ताल पर हैं।
हड़ताल के दौरान ड्राइवर अपने मोबाइल ऐप्स पर “लाइव” नहीं जाएंगे, जिससे शहर में पीली नंबर प्लेट वाले टैक्सी ऑटो सड़कों से नदारद रह सकते हैं। यूनियनों का आरोप है कि ऐप एग्रीगेटर कंपनियां न्यूनतम किराया, रेगुलेशन और ड्राइवर कल्याण से जुड़े केंद्र व राज्य के नियमों का पालन नहीं कर रहीं।
ड्राइवरों का कहना है कि कंपनियां मनमाने तरीके से किराया तय करती हैं, जिससे आमदनी अस्थिर होती है और कामकाजी हालात असहनीय बनते हैं। इसी मुद्दे पर यूनियनों ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को ज्ञापन सौंपकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
सम्बंधित ख़बरें
महिलाओं के लिए आरक्षित टॉयलेट में घुस रहे पुरुष! APMC मार्केट में बेसिक सुविधाओं की खुली पोल
मध्य रेल ने कबाड़ बेचकर कमाए 202.55 करोड़ रुपये! जानें क्या है जीरो स्क्रैप मिशन
घट जाएगा यात्रा का समय, कम होगी भीड़, पनवेल-कर्जत नए रेल कॉरिडोर का काम प्रोजेक्ट पूरा होने के करीब
महाराष्ट्र में 11 अगस्त से महंगा होगा दूध, जानें कितने रुपये बढ़ेंगे दाम और क्या है वजह?
ज्ञापन सौंपकर हस्तक्षेप की मांग
हड़ताल का असर खासतौर पर उन यात्रियों पर पड़ेगा जो रोजमर्रा के सफर के लिए ओला, उबर और रपिडो जैसे प्लेटफॉर्म पर निर्भर है। यूनियन नेताओं के अनुसार, मुंबई में ऐप-आधारित टैक्सी और ऑटो की संख्या बड़ी होने के कारण सार्वजनिक परिवहन और वैकल्पिक साधनों पर दबाव बढ़ सकता है।
ड्राइवर संगठनों की प्रमुख मांगों में एग्रीगेटर पॉलिसी 2025 को रद्द करना या उसमे संशोधन, न्यूनतम बेस फेयर का तत्काल नोटिफिकेशन, स्पष्ट किराया संरचना और नियामक निगरानी शामिल है। साथ ही, कथित अवैध बाइक टैक्सी सेवाओं पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।
ये भी पढ़ें :- कॉमेडियन कुणाल कामरा ने ‘सहयोग’ पोर्टल के खिलाफ हाईकोर्ट में दी चुनौती, अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला बताया
यूनियनों का दावा है कि अवैध सेवाओं से दुर्घटनाएं बढ़ी हैं और बीमा कवरेज न मिलने से पीड़ितों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। एक अन्य मुद्दा पैनिक बटन डिवाइस से जुड़ा है। यूनियनों के मुताबिक, कई ड्राइवरों को बार-बार डिवाइस बदलने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जिससे अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
