MPSC पेपर लीक में अफसर का बड़ा खेल! भतीजे के लिए फोड़ा पेपर, प्रेम प्रसंग का एंगल देकर दबाने की कोशिश

Paper Leak Scam: MPSC पेपर लीक मामले में शिकायतकर्ता ऋषिकेश गांगुर्डे ने पुलिस जांच पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मामले को प्रेम प्रसंग बताकर दबाने का आरोप लगाते हुए लेंडवे को मास्टरमाइंड बताया।
MPSC paper leak case: Complainant questions police investigation
एमपीएससी पेपर लीक घोटाला, प्रतीकात्मक तस्वीरसोर्स: AI
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MPSC Paper Leak Scam Mumbai: नीट के बाद महाराष्ट्र में अब एमपीएससी परीक्षा का पेपर लीक होने से छात्रों में भारी आक्रोश है। पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए अब तक छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें एक वरिष्ठ स्तर के अधिकारी की गिरफ्तारी भी हुई है। पेपर लीक मामले में एक प्रेम प्रसंग का एंगल सामने आने के बाद अब इस पर भी सवाल उठ रहे हैं। शिकायतकर्ता ऋषिकेश गांगुर्डे ने आरोप लगाया है कि प्रेम प्रसंग का एंगल दिखाकर असली पेपर लीक मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है।

गांगुर्डे ने कहा कि यह कोई प्रेम कहानी नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर पेपर लीक का मामला है। उन्होंने पुलिस की जांच पर भी गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि पुलिस ने असली आरोपी को छोड़कर दूसरे लोगों को पकड़ने का काम किया है।

लेंडवे पेपर लीक का मास्टरमाइंड

ऋषिकेश गांगुर्डे ने दावा किया कि जिस गौरव पाटील के साथ वह पेपर लीक मामले में शिकायत करने गए थे, वह आरोपी कैसे हो सकता है? उन्होंने बताया कि गौरव और उन्होंने तत्कालीन अधिकारी तुकाराम मुंढे से मुलाकात कर शिकायत की थी। इसके बाद वे एमपीएससी आयोग में गए और लेंडवे नामक अधिकारी से भी मुलाकात की थी। गांगुर्डे का आरोप है कि लेडवे ही पेपर लीक का मास्टरमाइंड है।

उन्होंने दावा किया कि पेपर ऋतुजा या उसके परिवार के किसी सदस्य ने नहीं फोड़ा था। गिरफ्तार किए गए नकाते नामक अधिकारी ने अपने भतीजे के लिए पेपर फोड़ा था। इसके बाद एक व्यक्ति ने यह पेपर 50 लाख रुपये में खरीदा और अपने पैसे वसूलने के लिए उसे 10-10 लाख रुपये में आगे बेच दिया। इसी तरह यह पेपर बड़े पैमाने पर कई लोगों तक पहुंचा।

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'सातारा, बीड, सोलापुर तक फैला नेटवर्क'

गांगुर्डे ने दावा किया कि इस पेपर लीक की पहुंच सातारा, बीड और सोलापुर तक है। इस मामले में शामिल कई लोग आपस में रिश्तेदार हैं। उन्होंने पुलिस से मांग की कि लेंडवे, नकाते और एक अन्य अधिकारी के सीडीआर तत्काल जांचे जाएं।

परीक्षा वाले दिन से लेकर उससे पहले के दिनों तक के सीडीआर की जांच की जाए तो पेपर लीक में शामिल कई आरोपियों तक पहुंचा जा सकता है।

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