

MPSC Excise Exam Marking Pattern Leak: MPSC एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में आ गया है। ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा का पेपर लीक होने के बड़े विवाद के बाद, अब Excise Department की परीक्षा में भी बड़ी धांधली का मामला सामने आया है।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के नेता रोहित पवार ने आरोप लगाया है कि पिछले साल आयोजित हुई इस परीक्षा का मार्किंग पैटर्न पहले ही लीक कर दिया गया था। इस खुलासे के बाद महाराष्ट्र के प्रतियोगी छात्रों और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग द्वारा 23 सितंबर 2025 को उपनिरीक्षक (गट-क) पद के लिए मर्यादित विभागीय स्पर्धा परीक्षा आयोजित की गई थी। रोहित पवार का आरोप है कि इस परीक्षा का मार्किंग पैटर्न लीक होने की वजह से कुछ खास चुनिंदा उम्मीदवारों को इसका सीधा फायदा पहुंचाया गया है।
इस पूरे खेल में परीक्षा के नाम पर लाखों रुपये के लेन-देन होने का गंभीर संदेह भी व्यक्त किया गया है। इसके अलावा, उम्मीदवारों ने यह भी आरोप लगाया है कि आयोग के अधिकारियों ने इस परीक्षा के अंतिम नतीजों को बेहद आनन-फानन में घोषित कर दिया।
इस कथित धांधली के खिलाफ कुछ पीड़ित उम्मीदवारों ने बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर खंडपीठ का दरवाजा खटखटाया है। अदालत में दायर की गई याचिका में बेहद चौंकाने वाला दावा किया गया है कि परीक्षा होने से ठीक एक हफ्ते पहले ही दो पेपरों के कुछ आधिकारिक प्रश्नों के फोटो व्हाट्सएप ग्रुप्स पर वायरल हो रहे थे।
जब वास्तविक परीक्षा आयोजित की गई, तो परीक्षा में आए कई सवाल व्हाट्सएप पर घूम रहे उन फोटो से हूबहू मेल खा रहे थे। यह गुप्त जानकारी पहले ही लीक हो जाने के कारण संबंधित उम्मीदवारों को अनुचित लाभ मिला, जिससे समान अवसर के सिद्धांत का पूरी तरह उल्लंघन हुआ है। इसी वजह से याचिकाकर्ताओं ने इस परीक्षा और इसके नतीजों को पूरी तरह रद्द कर नए सिरे से पारदर्शी परीक्षा कराने की मांग की है।
इस संवेदनशील मामले की गहराई से जांच नवी मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच द्वारा की गई थी। पुलिस ने अपनी जांच पूरी कर एक गोपनीय रिपोर्ट लोकसेवा आयोग को भेजी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद इस रिपोर्ट में महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग के जॉइंट सेक्रेटरी और कुछ अन्य अधिकारियों को दोषी पाया गया है।
पुलिस ने इन दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करने की सिफारिश भी की है। इसके साथ ही, इस मामले की शिकायत महाराष्ट्र प्रशासकीय न्यायाधिकरण (MAT), नागपुर में भी दर्ज कराई गई है, जहां यह मामला अभी न्यायप्रविष्ठ है।
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल आयोग की नीयत पर खड़ा हो रहा है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि ड्रग इंस्पेक्टर पेपर लीक मामले में जिन अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम शामिल थे, उन्हीं लोगों ने राज्य उत्पादन शुल्क परीक्षा में भी बड़ा घोटाला किया है। हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने लोकसेवा आयोग को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि नवी मुंबई पुलिस द्वारा दी गई गोपनीय रिपोर्ट को अदालत के समक्ष पेश किया जाए।
लेकिन 27 अगस्त 2026 को हुई सुनवाई के दौरान भी आयोग ने इस गोपनीय रिपोर्ट को अदालत में जमा नहीं किया। ऐसे में अब यह गंभीर सवाल उठ रहा है कि क्या आयोग जानबूझकर अपने दागी अधिकारियों को बचाने की कोशिश कर रहा है? इस मामले पर अब अगली और अंतिम सुनवाई 29 अगस्त 2026 को होने वाली है।