

Prajakt Tanpure ED Case Rahuri Bypoll: महाराष्ट्र की राजनीति में राहुरी विधानसभा उपचुनाव के लिए कल होने वाले मतदान से ठीक पहले एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। पूर्व राज्य मंत्री प्राजक्त तनपुरे को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच के मामले में उच्च न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। अदालत का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब राहुरी में चुनावी सरगर्मी अपने चरम पर है, जिससे क्षेत्र के राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं।
प्राजक्त तनपुरे नागपुर स्थित एक सहकारी चीनी फैक्ट्री की संदिग्ध खरीद के मामले में ईडी की रडार पर थे। उन्होंने इस जांच के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। हालांकि ईडी की जांच अंतिम चरण में बताई जा रही थी, लेकिन अदालत ने मतदान से ठीक एक दिन पहले तनपुरे के पक्ष में फैसला सुनाकर उन्हें बड़ी कानूनी संजीवनी दी है। उल्लेखनीय है कि तनपुरे इस बार खुद चुनाव नहीं लड़ रहे हैं, लेकिन क्षेत्र में उनके प्रभाव को देखते हुए भाजपा सहित सभी दलों की निगाहें उनके अगले कदम पर टिकी हैं।
पूरा मामला महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक में हुए लगभग 25,000 करोड़ रुपये के कथित घोटाले से जुड़ा है। जब राम गणेश गडकरी सहकारी चीनी कारखाना घाटे में गया, तो बैंक ने इसे अपने कब्जे में ले लिया था। साल 2012 में इस कारखाने की नीलामी की गई। ईडी का आरोप था कि नीलामी के समय प्राजक्त तनपुरे के पिता, पूर्व सांसद प्रसाद तनपुरे, बैंक के निदेशक मंडल में शामिल थे।
ईडी की जांच का मुख्य बिंदु कारखाने की बिक्री कीमत थी। आधिकारिक घोषणा के अनुसार, कारखाने की कीमत 26 करोड़ रुपये तय की गई थी। लेकिन आरोप है कि प्राजक्त तनपुरे की कंपनी 'प्रसाद शुगर एंड एलाइड' ने इसे महज 13 करोड़ रुपये में खरीद लिया। ईडी ने इस 50% की भारी छूट और सौदे की प्रक्रिया को संदिग्ध मानते हुए जांच शुरू की थी।
राहुरी उपचुनाव में भाजपा को बहुमत हासिल करने के लिए तनपुरे के समर्थन की आवश्यकता बताई जा रही है। राजनीतिक हलकों में चर्चा थी कि ईडी की जांच के दबाव के कारण ही तनपुरे ने नामांकन नहीं भरा और सत्तारूढ़ गठबंधन के प्रति नरम रुख अपनाया। अब कोर्ट के फैसले के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या तनपुरे खुलकर भाजपा का समर्थन करते हैं या अपनी तटस्थ भूमिका बरकरार रखते हैं। फिलहाल, मतदान से पहले इस कानूनी जीत ने राहुरी के चुनावी दंगल को बेहद तनावपूर्ण और दिलचस्प बना दिया है।