आरक्षण की जंग में फिर आमने-सामने मराठा और OBC, मनोज जरांगे के अनशन के बीच भड़के छगन भुजबल, महायुति में घमासान

Maratha vs OBC Reservation Maharashtra: महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण पर मनोज जरांगे पाटिल और छगन भुजबल के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है, जिससे महायुति सरकार में अंदरूनी घमासान मच गया है।
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छगन बुजबल और मनोज जरांगे(सोर्सः सोशल मीडिया)
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Chhagan Bhujbal OBC Reservation Statement: महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर बेहद गंभीर और विस्फोटक सामाजिक-राजनीतिक टकराव का रूप ले चुका है। जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में मनोज जरांगे पाटिल का अनिश्चितकालीन अनशन जारी है और उन्होंने मांगें पूरी न होने पर 11 सितंबर के बाद 'मुंबई कूच' करने का अल्टीमेटम दिया है।

इस बीच, राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ ओबीसी नेता छगन भुजबल ने अपनी ही महायुति सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। भुजबल ने साफ किया है कि यदि ओबीसी के 27 फीसदी कोटे से जरा सी भी छेड़छाड़ हुई, तो पूरा ओबीसी समाज सड़कों पर उतरकर विरोध दर्ज कराएगा।

छगन भुजबल बोले- फर्जी कुनबी प्रमाणपत्र बर्दाश्त नहीं

मंत्री छगन भुजबल ने सरकार की कार्यप्रणाली और मंत्रियों के रुख पर तीखे सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जाति जांच समितियों पर राजनीतिक दबाव बनाकर 'फर्जी कुनबी प्रमाणपत्रों' को वैध ठहराने का खेल चल रहा है, जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इसके साथ ही उन्होंने वित्तीय आवंटन में भेदभाव का मुद्दा उठाते हुए कहा कि मराठा समाज के अण्णासाहेब पाटिल आर्थिक विकास महामंडल को 750 करोड़ रुपये दिए गए, जबकि ओबीसी वित्त निगम को महज 5 करोड़ रुपये से संतोष करना पड़ा। भुजबल ने चेताया कि महायुति को सत्ता में लाने में ओबीसी वर्ग का अहम योगदान रहा है, इसलिए उनके अधिकारों की बलि न चढ़ाई जाए।

जरांगे का तीखा पलटवार: भुजबल कर रहे हैं विभाजनकारी राजनीति

छगन भुजबल के बयानों पर अनशन स्थल से प्रतिक्रिया देते हुए मनोज जरांगे पाटिल ने कड़ा प्रहार किया। जरांगे ने कहा कि भुजबल ने अपने पूरे राजनीतिक करियर में केवल ओबीसी समाज के नाम पर अपनी रोटियां सेकी हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि भुजबल को मराठा समाज के गरीब और जरूरतमंद युवाओं को शिक्षा व नौकरियों में हक मिलते देखकर जलन हो रही है। जरांगे के मुताबिक, भुजबल केवल अपने निजी राजनीतिक वजूद को बचाए रखने के लिए दो समुदायों के बीच दरार पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।

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महायुति सरकार के सामने दोहरा संकट

मनोज जरांगे की मुंबई बंदी की चेतावनी और छगन भुजबल के बागी तेवरों ने शिंदे-फडणवीस-पवार सरकार को दोहरे राजनीतिक संकट में धकेल दिया है। एक तरफ राज्य प्रशासन 58 लाख कुनबी रिकॉर्ड्स का हवाला देकर मराठा आंदोलनकारियों को शांत करने में जुटा है, तो दूसरी तरफ ओबीसी समुदाय अपने मौजूदा कोटे में किसी भी तरह की कटौती या नए वर्ग के समावेश के खिलाफ एकजुट हो रहा है। आगामी दिनों में यह गतिरोध महाराष्ट्र की कानून-व्यवस्था और राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से एक नया मोड़ ले सकता है।

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