मनोज जरांगे पाटिल ने फिर दी भूख हड़ताल की चेतावनी; 29 अगस्त की डेडलाइन से सरकार में हड़कंप
Manoj Jarange Patil Hunger Strike Threat: मराठा आंदोलनकारी मनोज जरांगे पाटिल ने 29 अगस्त से फिर भूख हड़ताल पर जाने का किया ऐलान; सरकारी अधिकारियों पर लगाए गंभीर आरोप।
- Written By: अनिल सिंह
29 अगस्त से दोबारा आमरण अनशन पर बैठेंगे मनोज जरांगे पाटिल (फोटो क्रेडिट-X)
Manoj Jarange Patil Hunger Strike Threat Maratha Reservation: महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण की आग एक बार फिर सुलगने लगी है। मराठा आंदोलन के प्रणेता मनोज जरांगे पाटिल ने मौजूदा महायुति सरकार को आड़े हाथों लेते हुए एक बार फिर से आमरण अनशन (भूख हड़ताल) पर जाने की खुली चेतावनी दे दी है। जरांगे पाटिल ने कहा कि यदि सरकार उन्हें राजनीतिक रूप से ‘बलि का बकरा’ बनाना चाहती है, तो वे इसके लिए भी तैयार हैं।
उन्होंने अपनी नई भूख हड़ताल के लिए 29 अगस्त 2026 की तारीख की घोषणा कर दी है, जो कि इस आंदोलन की तीसरी वर्षगांठ का दिन भी है। इस घोषणा के समय सरकार के प्रतिनिधि के रूप में भाजपा विधायक प्रसाद लाड और कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद थे, जिनके सामने जरांगे ने अपनी नाराजगी व्यक्त की।
सरकार के फैसले के बाद अधिकारियों का अड़ंगा
गौरतलब है कि पिछले साल मई के अंत में भीषण गर्मी के दौरान मनोज जरांगे पाटिल ने एक ऐतिहासिक भूख हड़ताल की थी, जिसके बाद सरकार बैकफुट पर आई थी और कई खुशनुमा फैसले लिए गए थे। सरकार ने मराठा समुदाय को ओबीसी (OBC) की तर्ज पर रियायतें देने का शासनादेश (GR) जारी किया था, कुनबी प्रमाणपत्र बांटने की प्रक्रिया शुरू की थी और आंदोलन के शहीदों के परिवारों को वित्तीय सहायता व एमआईडीसी (MIDC) में नौकरी देने का वादा किया था। लेकिन जरांगे का आरोप है कि सरकार की इस घोषणा के बाद जमीनी स्तर पर प्रशासनिक अधिकारियों और तहसीलदारों ने जानबूझकर अड़चनें पैदा करना शुरू कर दिया, जिसके कारण यह खुशी क्षणिक साबित हुई और मराठा भाइयों को आज भी प्रमाणपत्रों के लिए भटकना पड़ रहा है।
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राजस्व मंत्री पर गंभीर आरोप
जरांगे पाटिल ने बकायदा आंकड़ों के साथ प्रशासनिक विफलता को उजागर करते हुए कहा, “पश्चिमी महाराष्ट्र के कराड में कुनबी समुदाय के 35 हजार ऐतिहासिक अभिलेख (दस्तावेज) मौजूद हैं, लेकिन उन्हें अधिकारियों द्वारा जानबूझकर ब्लॉक कर दिया गया है। यही स्थिति मराठवाड़ा के लातूर अंतर्गत चाकुर और अन्य इलाकों की है। ये सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज ‘मोदी लिपि’ में लिखे गए हैं, लेकिन तहसीलदार और कलेक्टर इन्हें सत्यापित करने में रोड़े अटका रहे हैं।” जरांगे ने सीधे राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि पोर्टल पर अपलोड किए गए कई पुराने कुनबी अभिलेखों को नष्ट या गायब किया जा रहा है, जिसे मराठा समाज बर्दाश्त नहीं करेगा।
‘मराठा-कुनबी मंत्रालय’ की मांग, 29 अगस्त तक का अल्टीमेटम
आंदोलनकारी जरांगे पाटिल ने सरकार के सामने साफ किया कि उन्हें ओबीसी कोटे से कोई छेड़छाड़ नहीं चाहिए, लेकिन जिनके पास वैध दस्तावेज हैं, उनके अधिकार नहीं छीने जाने चाहिए। उन्होंने मंत्रिमंडल में शामिल दो ओबीसी मंत्रियों के विरोध पर भी निराशा जताई। जरांगे ने सरकार से तत्काल एक स्वतंत्र ‘मराठा-कुनबी मंत्रालय’ गठित करने की मांग की है। उन्होंने कहा, “राज्य में 40 हजार से अधिक गांवों-बस्तियों में हमारे 53 हजार मराठा कर्मचारी तैनात हैं, जिन्होंने हमें इस प्रशासनिक लापरवाही की तत्काल सूचना दी है। सरकार को इसी शैक्षणिक वर्ष से सभी लंबित आदेशों को सख्ती से लागू करना होगा। यदि 29 अगस्त तक हमारी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो महाराष्ट्र एक बार फिर बड़े आंदोलन का गवाह बनेगा।” वहीं, मौके पर मौजूद विधायक प्रसाद लाड ने सरकार की ओर से आश्वस्त किया कि वे इन सभी मांगों को मुख्यमंत्री के समक्ष रखकर जल्द से जल्द पूरा कराने का प्रयास करेंगे।
