BMC Schools में ‘मनाचे श्लोक’ लागू करने का प्रस्ताव, समर्थन और विरोध आमने-सामने

BMC Schools: ‘मनाचे श्लोक’ को बीएमसी स्कूलों में अनिवार्य करने के प्रस्ताव ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। जहां इसे नैतिक शिक्षा से जोड़ा जा रहा है, वहीं विपक्ष इसे धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ बता रहा है।
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किशोरी पेडनेकर (सौ. सोशल मीडिया )
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Manache Shlok in BMC Schools Mumbai: शहर में शिक्षा और सांस्कृतिक मूल्यों को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। शिवसेना यूबीटी की नेता किशोरी पेडणेकर की तरफ से मनपा के स्कूलों में 'मनाचे श्लोक' को अनिवार्य करने के प्रस्ताव ने राजनीतिक बहस छेड़ दी है।

इस प्रस्ताव का कुछ वर्गों द्वारा समर्थन किया जा रहा है, तो वहीं ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एमआईएम) के गुट नेता नगरसेवक विजय उबाले ने इसका कड़ा विरोध किया है।

पूर्व महापौर और वर्तमान विपक्ष नेता किशोरी पेडणेकर ने BMC Schools में संत समर्थ रामदास द्वारा रचित 'मनाचे श्लोक' का नियमित पाठ शुरू करने का प्रस्ताव रखा है। उनके अनुसार, यह पहल छात्रों में नैतिक मूल्यों, आत्म-अनुशासन और सकारात्मक सोच विकसित करने में सहायक साबित होगी।

BMC Schools में धर्म नहीं, संविधान पढ़ाओ

उन्होंने स्पष्ट किया कि 'मनाचे श्लोक' किसी एक धर्म विशेष तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह जीवन के आदर्शों और मानसिक सुदृढ़ता का संदेश देते हैं। पेडणेकर का मानना है कि आज के प्रतिस्पर्धी और तनावपूर्ण माहौल में बच्चों को मानसिक रूप से मजबूत बनाने की जरूरत है।

ऐसे में इस तरह के प्रेरणादायक श्लोक छात्रों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने इसे शिक्षा के समग्र विकास से जोड़ते हुए इसे लागू करने की वकालत की है। हालांकि, इस प्रस्ताव का एमआईएम ने तीखा विरोध किया है।

पार्टी का कहना है कि सरकारी स्कूलों में किसी भी प्रकार की धार्मिक या सांस्कृतिक सामग्री को अनिवार्य करना संविधान की धर्मनिरपेक्ष भावना के खिलाफ है। एमआईएम नेताओं के अनुसार, बीएमसी स्कूलों में विभिन्न धर्मों और पृष्ठभूमि के छात्र पढ़ते हैं, ऐसे में किसी एक परंपरा को अनिवार्य बनाना उचित नहीं होगा।

प्रस्ताव पर बीएमसी की आगामी सभा में चर्चा होगी

विरोध करने वालों का यह भी तर्क है कि शिक्षा प्रणाली को पूरी तरह से समावेशी और तटस्थ बनाए रखना जरूरी है, ताकि सभी छात्रों को समान वातावरण मिल सके। उन्होंने चेतावनी दी है कि इस तरह के फैसले सामाजिक और धार्मिक विभाजन को बढ़ावा दे सकते हैं।

इस मुद्दे पर आगामी दिनों में और अधिक राजनीतिक घमासान देखने को मिल सकता है। बताया जा रहा है कि इस प्रस्ताव पर बीएमसी की सभा में चर्चा होगी, जहां विभिन्न दलों के नगरसेवक अपनी राय रखेंगे, मुंबई जैसे बहु-सांस्कृतिक और विविधता वाले शहर में इस तरह के प्रस्ताव हमेशा संवेदनशील माने जाते हैं। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि प्रशासन इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाता है और क्या यह प्रस्ताव अमल में लाया जाता है या नहीं।

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