मालेगांव बम ब्लास्ट केस: बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 4 आरोपी बरी, ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द

Malegaon Blast Case: बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2006 मालेगांव ब्लास्ट केस में राजेंद्र चौधरी और लोकेश शर्मा सहित चार आरोपियों को बरी कर दिया है। अदालत ने ट्रायल कोर्ट के आरोप तय करने वाले आदेश को खारिज किया।
Bombay High Court Verdict In Malegaon Blast Case
मालेगांव बम ब्लास्ट (फाइल फोटो, सोर्स- सोशल मीडिया)
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Bombay High Court Verdict In Malegaon Blast Case: 2006 के मालेगांव बम विस्फोट मामले में एक बड़ा कानूनी मोड़ आया है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए इस मामले के चार प्रमुख आरोपियों के खिलाफ चल रहे ट्रायल को समाप्त कर दिया और उन्हें बरी करने का आदेश दिया। अदालत का यह फैसला उन आरोपियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है जो लंबे समय से कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे।

हाईकोर्ट का हस्तक्षेप और फैसला

चीफ जस्टिस चंद्रशेखर और जस्टिस श्याम चांदक की डिवीजन बेंच ने आरोपियों द्वारा दायर अपीलों पर सुनवाई करते हुए यह निर्णय लिया। दरअसल, आरोपियों ने सितंबर 2025 में एक विशेष अदालत द्वारा उनके खिलाफ आरोप (Charges) तय किए जाने के आदेश को चुनौती दी थी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने न केवल आरोप तय करने के आदेश को रद्द किया, बल्कि अपील में देरी को भी माफ कर दिया। अदालत ने माना कि एनआईए अधिनियम (NIA Act) की धारा 21 के तहत यह एक वैधानिक अपील थी, जिसे सुना जाना अनिवार्य था।

कौन हैं बरी हुए आरोपी?

हाईकोर्ट के मालेगांव ब्लास्ट केस के मामले में दिए फैसले से जिन चार लोगों को राहत मिली है, उनमें राजेंद्र चौधरी, धन सिंह, मनोहर राम सिंह नरवारिया और लोकेश शर्मा शामिल हैं। हाईकोर्ट के आज के फैसले से इन आरोपियों के खिलाफ मामला बंद हो गया और उनके खिलाफ चल रहा ट्रायल भी खत्म हो गया। इन आरोपियों ने ट्रायल कोर्ट के उस तरीके पर सवाल उठाए थे जिसके तहत उन पर आरोप तय किए गए थे, जबकि इसी मामले के कई अन्य सह-आरोपियों को पहले ही बरी किया जा चुका था।

Malegaon Blast Case: ATS से NIA तक का सफर

महाराष्ट्र के नासिक जिले के मालेगांव में  8 सितंबर 2006 को हुए सिलसिलेवार धमाकों ने पूरे देश को दहला दिया था, जिसमें 37 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी। इस मामले की जांच की परतें समय-समय पर बदलती रहीं।

  • ATS जांच: शुरुआत में महाराष्ट्र एटीएस ने जांच की और 12 लोगों को गिरफ्तार कर दिसंबर 2006 में चार्जशीट दाखिल की।
  • CBI जांच: फरवरी 2007 में मामला सीबीआई को सौंपा गया।
  • NIA जांच: अंततः राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने कमान संभाली और एक नई सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की, जिसमें इन चार आरोपियों को शामिल किया गया था। आज के फैसले के बाद इन चारों के खिलाफ चल रहा मुकदमा आधिकारिक रूप से बंद हो गया है।
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