मुंबई से सुरजागड तक विकास की नई लकीर; महायुति सरकार ने बिछाया 4 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट्स का जाल

Eknath Shinde Mumbai Development: मुंबई को स्लम-फ्री बनाने और एमएमआर में 4 लाख करोड़ के विकास कार्यों का रोडमैप। जानिए धारावी पुनर्विकास से लेकर '60 मिनट मुंबई' और पर्यावरण अनुकूल विकास की पूरी योजना।
A New Horizon of Development from Mumbai to Surjagad: The Mahayuti Government Lays a Network of Projects Worth ₹4 Lakh Crore
एकनाथ शिंदे (फाइल फोटो, सोर्स: सोशल मीडिया)
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Slum Free Mumbai Mission: विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाते हुए महायुति सरकार ने मुंबई को पूरी तरह झोपड़पट्टी मुक्त बनाने और राज्य को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था में बदलने का एक 'महा मिशन' शुरू किया है। मुंबई के साथ-साथ सुदूर और दुर्गम इलाकों का संतुलित विकास इस योजना का मुख्य स्तंभ है।

दि हिंदू कॉन्क्लेव' में  मुंबई से सुरजागड समृद्धि का महामार्ग विषय पर बोलते हुए उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य केवल बड़े शहरों का विकास करना नहीं, बल्कि 'कोस्ट टू फॉरेस्ट' यानी मुंबई से लेकर गढ़चिरौली के सुरजागड तक विकास की एक नई और अटूट श्रृंखला तैयार करना है। इसी व्यापक दृष्टिकोण के तहत मुंबई को स्लम फ्री बनाने और सुदूर क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठाए जा रहे हैं।

नई आवास नीति का आगाज

मुंबई को झोपड़पट्टी मुक्त करने के अपने संकल्प को दोहराते हुए उप मुख्यमंत्री शिंदे ने कहा कि सरकार 'हिंदू हृदय सम्राट बालासाहेब ठाकरे नागरी लोक कल्याण अभियान' के तहत एक विशेष और आक्रामक मुहिम चला रही है। शहर में नए अतिक्रमणों को पूरी तरह रोकने के लिए अत्याधुनिक 'नेत्रम' तकनीक, सैटेलाइट डेटा और जीआईएस मैपिंग की मदद ली जा रही है। इसके साथ ही, धारावी पुनर्विकास परियोजना को दुनिया के सबसे बड़े और आधुनिक पुनर्विकास मॉडल के रूप में लागू किया जा रहा है, जिसमें पात्र और अपात्र दोनों श्रेणी के नागरिकों के लिए स्वतंत्र आवास योजनाएं शामिल हैं। मुंबई और एमएमआर क्षेत्र में घरों की बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार ने 17 वर्षों के बाद एक दूरगामी आवास नीति लागू की है। "माय होम - माय राइट" (मेरा घर - मेरा अधिकार) की संकल्पना के साथ साल 2030 तक आर्थिक रूप से कमजोर और अल्प आय वर्ग के लिए 35 लाख किफायती घर बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके पारदर्शी संचालन के लिए एआई (एआई) आधारित केंद्रीय डिजिटल हाउसिंग पोर्टल विकसित किया जा रहा है।

एमएमआर में 4 लाख करोड़ के गेम चेंजर प्रोजेक्ट्स

मुंबई को देश का 'ग्रोथ इंजन' और वैश्विक फिनटेक कैपिटल बनाने के लिए नीति आयोग के रोड मैप के अनुसार काम चल रहा है, जिससे यहां की जीडीपी को दोगुना किया जा सके। वर्तमान में मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) में लगभग 4 लाख करोड़ रुपए की बुनियादी ढांचा परियोजनाएं गति पकड़ चुकी हैं। इनमें अटल सेतु, कोस्टल रोड, बुलेट ट्रेन, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, मेट्रो विस्तार और वाढवण बंदरगाह जैसे बड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं।

सरकार का मुख्य लक्ष्य "60 मिनट की मुंबई" की अवधारणा को पूरा करना है, ताकि नागरिक शहर के एक छोर से दूसरे छोर तक मात्र एक घंटे में पहुंच सकें। इसके लिए 337 किलोमीटर लंबा मेट्रो नेटवर्क और मल्टीमोडल ट्रांसपोर्ट सिस्टम तैयार किया जा रहा है। इसके साथ ही, मुंबई के सैटलाइट शहरों को केवल आवासीय क्षेत्र न रखकर उन्हें आत्मनिर्भर आर्थिक केंद्र बनाया जा रहा है, जिसके तहत कल्याण को लॉजिस्टिक्स हब, डोंबिवली को नॉलेज हब और अंबरनाथ को एमएसएमई हब के रूप में विकसित किया जा रहा है।

पर्यावरण अनुकूल विकास

डीसीएम एकनाथ शिंदे ने कहा कि महायुति सरकार आर्थिक और बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी उतनी ही प्राथमिकता दे रही है। महालक्ष्मी रेसकोर्स में 295 एकड़ भूमि पर एक विशाल 'सेंट्रल पार्क' विकसित किया जा रहा है, जो देश के सबसे बड़े शहरी हरित क्षेत्रों में से एक होगा। इसके अलावा ठाणे में 25 एकड़ का 'नमो ग्रैंड सेंट्रल पार्क' और पूरे राज्य में 394 'नमो गार्डन्स' का निर्माण किया जा रहा है।

मुंबई को बाढ़ और जलजमाव की समस्या से स्थाई रूप से बचाने के लिए स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज, अत्याधुनिक पंपिंग स्टेशन, आईफ्लो प्रणाली और मीठी नदी सुधार परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है। उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सभी बड़े प्रोजेक्ट्स में पर्यावरण के कड़े नियमों का पालन सुनिश्चित किया गया है ताकि विकास की यह रफ्तार प्रकृति के संतुलन के साथ आगे बढ़ती रहे।

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