गेटवे ऑफ इंडिया की डीजल नौकाएं होंगी इलेक्ट्रिक; ईंधन खर्च और प्रदूषण घटाने के लिए नीति बनाएगी सरकार

Mumbai Tourism News: मुंबई के गेटवे ऑफ इंडिया पर चलने वाली सभी डीजल नौकाओं को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक बोट्स में बदला जाएगा। बोट मालिकों को कम ब्याज पर लोन देने के लिए नीति बनेगी।
Maharashtra government to replace all diesel boats at Gateway of India with electric ones, partnering with Mumbai Bank to provide low-interest loans.
डीजल नौकाओं (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Mumbai Gateway of India Electric Boats: वैश्विक स्तर पर लगातार बढ़ती पेट्रोल-डीजल की कीमतों और पर्यावरण संरक्षण की जरूरत को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार अब समुद्री परिवहन क्षेत्र में बड़ा बदलाव करने जा रही है। राज्य सरकार ने दक्षिण मुंबई के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल गेटवे ऑफ इंडिया क्षेत्र में चलने वाली डीजल नौकाओं को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक बोट्स में बदलने का निर्णय लिया है। सरकार का मानना है कि इस पहल से न केवल ईंधन खर्च में भारी कमी आएगी, बल्कि समुद्री प्रदूषण भी कम होगा और पर्यावरण अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

इस महत्वाकांक्षी योजना को लागू करने के लिए राज्य सरकार मुंबई  बैंक के सहयोग से एक विशेष नीति तैयार करेगी। इसके तहत बोट मालिकों को इलेक्ट्रिक बोट खरीदने या पुरानी डीजल नौकाओं को इलेक्ट्रिक सिस्टम में परिवर्तित करने के लिए कम ब्याज दर पर विशेष ऋण सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार का उद्देश्य है कि आर्थिक कारणों से कोई भी नौका संचालक इस बदलाव से पीछे न रहे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा फ्यूल इकॉनमी और ग्रीन एनवायरनमेंट को लेकर दिए गए संदेश का असर अब राज्य सरकार की नीतियों में भी दिखाई देने लगा है। इसी दिशा में मत्स्य पालन एवं बंदरगाह विकास मंत्री मंत्री राणे ने मंगलवार को मुंबई बैंक के चेयरमैन और भाजपा विधायक परिषद सदस्य प्रवीण दरेकर के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में इलेक्ट्रिक बोट्स को बढ़ावा देने, बोट मालिकों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने और उनके लिए विशेष लोन स्कीम तैयार करने पर विस्तार से चर्चा हुई।

मंत्री राणे ने बताया कि वर्तमान में गेटवे ऑफ इंडिया इलाके में करीब 97 लाइसेंस प्राप्त लकड़ी की नौकाएं संचालित हो रही हैं। ये सभी नौकाएं डीजल से चलती हैं, जिसके कारण बोट मालिकों को हर महीने ईंधन पर लगभग एक लाख रुपये तक खर्च करना पड़ता है। लगातार बढ़ती डीजल कीमतों से नौका संचालकों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है। ऐसे में इलेक्ट्रिक बोट्स उनके लिए एक किफायती विकल्प साबित हो सकती हैं।

सरकार का दावा है कि इलेक्ट्रिक बोट्स के इस्तेमाल से संचालन लागत में बड़ी कमी आएगी। साथ ही समुद्र में ध्वनि और वायु प्रदूषण भी घटेगा, जिससे मुंबई के समुद्री तटीय क्षेत्र का पर्यावरण बेहतर होगा। इसके अलावा पर्यटकों को भी शांत, आधुनिक और प्रदूषण मुक्त सफर का अनुभव मिलेगा।

बैठक में यह भी चर्चा हुई कि भविष्य में केवल पैसेंजर बोट्स ही नहीं, बल्कि मछली पकड़ने वाली फिशिंग बोट्स को भी इलेक्ट्रिक तकनीक से जोड़ने की योजना बनाई जा सकती है। सरकार इसके लिए चरणबद्ध रणनीति तैयार करेगी। शुरुआती दौर में कुछ नौकाओं को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इलेक्ट्रिक मॉडल में परिवर्तित किया जाएगा। यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो आने वाले वर्षों में पूरे क्षेत्र में इलेक्ट्रिक बोट्स को बढ़ावा दिया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि मुंबई जैसे महानगर में समुद्री परिवहन को इलेक्ट्रिक मॉडल में बदलना एक बड़ा और दूरगामी कदम साबित हो सकता है। इससे ईंधन पर निर्भरता कम होगी, पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी और पर्यटन उद्योग को नई दिशा मिलेगी।

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