

Maharashtra Electoral Roll SIR Special Intensive Revision: महाराष्ट्र की 288 विधानसभा सीटों में से 25 सीटों पर ऐसे मतदाताओं की संख्या 85 फीसदी से अधिक है, जिनके नाम स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के तहत तैयार प्रारूप मतदाता सूची में शामिल नहीं किए गए हैं और जिन्हें 'स्थायी रूप से स्थानांतरित' या 'पता नहीं चलने/अनुपस्थित' के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा जारी विधानसभा क्षेत्रवार आंकड़ों के विश्लेषण से यह जानकारी सामने आई है। 10 विधानसभा क्षेत्रों में यह अनुपात 90 फीसदी से अधिक है। कल्याण ग्रामीण में यह सबसे अधिक 94.7 फीसदी है। इसके बाद ओवला-माजिवाड़ा में 93.3 फीसदी और नालासोपारा में 93 फीसदी है।
संयुक्त रूप से इन दोनों श्रेणियों का हिस्सा 59 विधानसभा क्षेत्रों में 80 फीसदी से अधिक और 82 सीटों पर 75 फीसदी से अधिक है। यह विश्लेषण महाराष्ट्र राज्य की सभी 288 विधानसभा सीटों को शामिल करता है और प्रत्येक सीट में प्रारूप सूची से बाहर किए गए कुल मतदाताओं में स्थायी रूप से स्थानांतरित तथा पता नहीं चलने/अनुपस्थित मतदाताओं का अनुपात बताता है।
इन 25 विधानसभा सीटों को मिलाकर प्रारूप सूची में 49,11,297 नाम शामिल नहीं किए गए हैं। इनमें से 43,81,483 नाम स्थायी रूप से स्थानांतरित या पता नहीं चलने/अनुपस्थित श्रेणी में हैं। यानी इन 25 सीटों पर बाहर किए गए नामों में इन दोनों श्रेणियों की हिस्सेदारी 89.2 फीसदी है।
2.07 करोड़ नाम प्रारूप सूची से बाहर, 73.6% का कारण पता नहीं चलना या स्थायी स्थानांतरण है। इनमें 76.76 लाख स्थायी रूप से स्थानांतरित और 75.41 लाख अनुपस्थित/पता नहीं चलने वाले मतदाता हैं। इसके अलावा 34.82 लाख मृत, 17.66 लाख डुप्लीकेट और 2.22 लाख अन्य कारणों से सूची में शामिल नहीं किए गए हैं।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि प्रारूप सूची से नाम गायब होना अंतिम रूप से मतदाता सूची से हटना नहीं है। फॉर्म नहीं मिलने के कारण करीब 2.07 करोड़ नाम प्रारूप सूची में शामिल नहीं हो सके। 31 अगस्त की सूची में 7.71 करोड़ मतदाता हैं। नाम छूटने वाले मतदाता 30 सितंबर तक फॉर्म-6 के जरिए दावा कर सकते हैं। दावों की जांच के बाद 4 नवंबर को अंतिम मतदाता सूची जारी होगी।