राम मंदिर चंदा विवाद पर शिंदे का पलटवार: बोले- सिद्धिविनायक मंदिर की दान पेटी लूटी गई, तब जांच क्यों नहीं हुई?

Maharashtra Politics: राम मंदिर चंदा चोरी के मुद्दे पर महाराष्ट्र विधान परिषद में तीखी बहस। एकनाथ शिंदे ने पलटवार करते हुए एमवीए सरकार के समय के सिद्धिविनायक ट्रस्ट के कथित घोटाले को उठाया।
High drama in Maharashtra Legislative Council over Ram Mandir donation row. CM Eknath Shinde counters opposition by raising past allegations against Siddhivinayak Trust.
एकनाथ शिंदे (फोटो सोर्स - सोशल मीडिया )
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Ram Mandir Donation Eknath Shinde Statement: अयोध्या के राम मंदिर में चंदा चोरी के मुद्दे को लेकर महाराष्ट्र विधान परिषद में शुक्रवार को जमकर राजनीतिक बहस हुई। मानसून सत्र के अंतिम दिन विपक्ष ने इस मामले पर महायुति सरकार को घेरने की कोशिश की। जवाब देते हुए उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने विपक्ष पर पलटवार किया और पूर्व महाविकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार के कार्यकाल में दादर स्थित सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया।

'राम मंदिर में दोषी बच नहीं पाएंगे'

एकनाथ शिंदे ने कहा कि राम मंदिर में यदि किसी ने चंदे में गड़बड़ी या चोरी की है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ऐसे मामलों में किसी भी दोषी को बख्शने वाले नहीं हैं। शिंदे ने कहा कि कानून अपना काम करेगा और दोषियों को सजा मिलेगी।

सिद्धिविनायक मंदिर का मुद्दा उठाकर विपक्ष पर निशाना

एकनाथ शिंदे ने  उद्धव ठाकरे का नाम लिए बिना कहा कि जो लोग आज राम मंदिर का मुद्दा उठा रहे हैं, उनके शासनकाल में सिद्धिविनायक मंदिर की दान पेटी से जुड़े कथित घोटाले के आरोप सामने आए थे। उन्होंने सवाल किया कि उस समय मामले की निष्पक्ष जांच क्यों नहीं कराई गई और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

'मेरे पास आरोपों के सबूत हैं'

शिंदे ने सदन में दावा किया कि उनके पास अपने आरोपों के समर्थन में पर्याप्त आधार और सबूत हैं। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के नेता यशवंत किल्लेदार ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के तत्कालीन अध्यक्ष आदेश बांदेकर पर कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए थे। शिंदे ने यह भी कहा कि उस समय मनसे और शिवसेना (उद्धव गुट) के संबंध बेहद तनावपूर्ण थे, इसलिए उस बयान को राजनीतिक नज़रिए से नहीं देखा जा सकता।

सियासी आरोप-प्रत्यारोप तेज

राम मंदिर चंदा विवाद को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। विपक्ष जहां सरकार से मामले में पारदर्शी जांच और जवाबदेही की मांग कर रहा है, वहीं महायुति सरकार विपक्ष के पुराने कार्यकाल के कथित मामलों का हवाला देकर जवाब दे रही है। ऐसे में धार्मिक संस्थाओं से जुड़े वित्तीय मामलों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

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