

HSRP लगाने में देरी पर परिवहन आयुक्त ने 27 RTO प्रमुखों को नोटिस दिया।
अधिकारियों को 7 दिनों में जवाब देने का निर्देश, कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।
ठेकेदारों की कार्यप्रणाली और जवाबदेही की जांच की मांग उठी।
Maharashtra Transport Department: महाराष्ट्र में पुराने वाहनों पर हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) लगाने की धीमी रफ्तार अब परिवहन विभाग के अधिकारियों पर भारी पड़ने वाली है। पता चला है,समय सीमा बीत जाने के बाद भी निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले आधे से कम वाहनों पर ही HSRP लगाने से राज्य परिवहन विभाग को सरकार ने फटकार लगाई है। इस मामले में परिवहन आयुक्त राजेश नार्वेकर ने राज्यभर के 27 क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (RTO) के प्रमुखों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
परिवहन अधिकारियों को नोटिस मिलने के सात दिनों के भीतर जवाब देना होगा। संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिलने पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। परिवहन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, 1 अप्रैल 2019 से पहले पंजीकृत 50 प्रतिशत से अधिक वाहनों पर अब तक HSRP नहीं लगाई जा सकी है।
इस सुस्ती को गंभीरता से लेते हुए परिवहन आयुक्त ने संबंधित RTO प्रमुखों से पूछा है कि बार-बार समीक्षा और निर्देशों के बावजूद प्लेट लगाने के काम में अपेक्षित प्रगति क्यों नहीं हुई? उल्लेखनीय है कि परिवहन आयुक्त जुलाई से अब तक इस अभियान की तीन बार समीक्षा कर चुके हैं। 7 अक्टूबर को परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने भी इस संबंध में समीक्षा बैठक की थी।
बैठक में सामने आया कि करीब 25 से 30 RTO कार्यालयों में 50 प्रतिशत से भी कम वाहनों पर HSRP लगाई गई है। इस पर मंत्री ने नाराजगी जताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब तलब करने के निर्देश दिए थे।
HSRP लगाने में देरी को लेकर RTO प्रमुखों को नोटिस जारी होने के बाद कुछ अधिकारियों ने अलग सवाल उठाए हैं। कुछ अधिकारियों का कहना है कि देरी के लिए केवल परिवहन अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।
HSRP लगाने का वास्तविक काम अधिकृत ठेकेदारों के माध्यम से हो रहा है। ऐसे में ऑनलाइन बुकिंग, अपॉइंटमेंट, प्लेट की उपलब्धता, केंद्रों की संख्या और सेवा क्षमता की भी जांच जरूरी है। परिवहन विभाग ने वायुवेग टीमों के जरिए कार्रवाई और जनजागरूकता अभियान भी चलाए हैं। ऐसे में अधिकारियों के साथ ठेकेदारों की कार्यप्रणाली और जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
HSRP प्लेट विशेष एल्यूमीनियम मिश्रधातु से बनाई जाती है। इसमें INDIA लिखी रिफ्लेक्टिव फिल्म, क्रोमियम आधारित अशोक चक्र का होलोग्राम, नीले रंग में IND अक्षर और लेजर से अंकित 10 अंकों का विशिष्ट पहचान नंबर होता है। इसकी खास बनावट के कारण प्लेट के साथ छेड़छाड़ करना मुश्किल होता है। वाहन की पहचान और सुरक्षा मजबूत करने के उद्देश्य से यह व्यवस्था लागू की गई है।