Maharashtra Stamp Duty Scam; राजस्व मंत्री बावनकुले ने कहा- दोषी अधिकारी होंगे बर्खास्त,राज्य में जांच के आदेश

Maharashtra Stamp Duty Scam: महाराष्ट्र में स्टैम्प ड्यूटी मामलों की एजी जांच होगी। राजस्व मंत्री बावनकुले ने 10-20 हजार करोड़ के घोटाले की आशंका जताई, दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई।
Maharashtra Stamp Duty Scam AG Investigation In Navi Mumbai
राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले (सोर्स: डिजाईन फोटो)
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Maharashtra Stamp Duty Scam AG Investigation: महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने विधानसभा में घोषणा की है कि राज्य में मुद्रांक शुल्क (स्टैम्प ड्यूटी) निर्धारण के मामलों में हुए कथित भ्रष्टाचार की महालेखाकार (एजी) के विशेष कार्य बल के माध्यम से सखोल जांच की जाएगी।

नवी मुंबई में अनधिकृत इमारतों के दस्तावेजों का अवैध पंजीकरण कर सरकार को करोड़ों रुपए के राजस्व का चूना लगाने वाले दोषी अधिकारियों को केवल निलंबित न करके सीधे सेवा से बर्खास्त किया जाएगा। विधायक जितेंद्र आव्हाड द्वारा सदन में उठाए गए एक प्रश्न का उत्तर देते हुए राजस्व मंत्री ने यह जानकारी दी।

दस दिनों में आठ सौ अवैध पंजीकरण

नवी मुंबई में एक वरिष्ठ लिपिक ने मुद्रांक अधिकारी का कार्यभार संभालने के महज दस दिनों के भीतर आठ सौ से अधिक दस्तावेजों का अवैध पंजीकरण कर दिया। इस अधिकारी ने एमआरटीपी कानून 1966 और मुद्रांक अधिनियम 1908 के प्रावधानों का उल्लंघन कर अवैध इमारतों का पंजीकरण किया, जिससे सरकार को 13 करोड़ 99 लाख रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ। इस मामले में तुर्भे पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज कर आरोपी अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है। शासन बिल्डरों के साथ मिलीभगत के इस सुनियोजित घोटाले के दोषी अधिकारी को सेवा से स्थायी रूप से बर्खास्त करने के लिए कानूनी कदम उठा रहा है।

राजव्यापी जांच और विशेष टास्क फोर्स

अधिकारियों द्वारा 'एड्जुडिकेशन' के नाम पर पहले अधिक मुद्रांक शुल्क लगाने और बाद में उसे कम करने के मामले सामने आए हैं। इसके मद्देनजर राजस्व मंत्री ने एक अप्रैल 2021 से 31 मार्च 2026 के बीच राज्य में हुए सभी एड्जुडिकेशन मामलों की राज्यव्यापी जांच के आदेश दिए हैं।

महालेखाकार पर काम के बढ़ते बोझ को देखते हुए इस जांच के लिए एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा, जिसे राज्य सरकार आवश्यक धन और मैनपावर उपलब्ध कराएगी। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने दावा किया है कि इस विस्तृत जांच से करीब दस से बीस हजार करोड़ रुपए का बड़ा घोटाला उजागर होने की संभावना है।

अधिकारियों के लिए नई एसओपी जारी

मुद्रांक शुल्क में मिलने वाले अर्ध-न्यायिक अधिकार असीमित नहीं हैं, इसलिए अधिकारियों को स्टैम्प एक्ट के दायरे में रहकर ही काम करना होगा। इस प्रकार के कदाचार को रोकने के लिए राज्य सरकार ने एक नई नियमावली और शासनादेश जारी कर दिया है।

इसके तहत एड्जुडिकेशन के दौरान यदि कोई भी अधिकारी तय नियमों के बाहर जाकर काम करता है, तो उसके खिलाफ सीधे आपराधिक मामले दर्ज कर कठोर फौजदारी कार्रवाई की जाएगी।

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