सांप के डसने पर नहीं होगी लापरवाही, महाराष्ट्र में रखा जाएगा हर केस का रिकॉर्ड, गांवों में पहुंचेगा ASV

Maharashtra Government ने सर्पदंश को अधिसूचित बीमारी घोषित किया है। अब हर केस और संदिग्ध मौत दर्ज होगी, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में एंटी स्नेक वेनम की उपलब्धता बढ़ाई जाएगी।
Maharashtra Snakebite Notified Disease
महाराष्ट्र में अब सर्पदंश का हर केस होगा दर्ज( सोर्स: AI)
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Maharashtra Snakebite Notified Disease: महाराष्ट्र में सर्पदंश से होने वाली मौतों पर रोक लगाने और ग्रामीण क्षेत्रों में समय पर इलाज सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है।

सरकार ने 19 अगस्त 2026 से सर्पदंश को 'अधिसूचित बीमारी' घोषित करने का निर्णय लिया है। अब राज्य के सरकारी और निजी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों तथा स्वतंत्र डॉक्टरों के लिए सर्पदंश के प्रत्येक मामले और संदिग्ध मौत की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को देना अनिवार्य होगा।

तीन साल में सर्पदंश से 656 मौतें

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार महाराष्ट्र में पिछले तीन वर्षों के दौरान सर्पदंश के करीब 1.29 लाख मामले दर्ज किए गए, जिनमें 656 लोगों की मौत हुई। वर्ष 2024-25 में ही 38,491 सर्पदंश के मामलों में 282 मौतें दर्ज की गईं।

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है, क्योंकि ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में कई मामले अस्पतालों तक पहुंचने से पहले ही दर्ज नहीं हो पाते।

हर मरीज का रिकॉर्ड होगा तैयार

सर्पदंश को अधिसूचित बीमारी घोषित करने के बाद अब मरीजों से जुड़ी विस्तृत जानकारी दर्ज की जाएगी। इसमें सांप के काटने का समय और स्थान, मरीज की उम्र, लक्षण, एंटी स्नेक वेनम (ASV) की दी गई खुराक और इलाज के परिणाम जैसी जानकारियां शामिल होंगी।

अस्पतालों के निदेशक, जिला शल्य चिकित्सक और महानगरपालिका के चिकित्सा अधिकारी इस पूरी व्यवस्था की निगरानी के लिए नोडल अधिकारी के रूप में काम करेंगे।

गांवों तक एंटी स्नेक वेनम

स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर के अनुसार इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और सर्पदंश प्रभावित क्षेत्रों में एंटी स्नेक वेनम (ASV) की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना है। सर्पदंश के बाद मरीज को समय पर इलाज नहीं मिलने से स्थिति गंभीर हो सकती है। ऐसे में अस्पतालों में आवश्यक दवाओं और आपातकालीन सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने में नए सिस्टम से मदद मिलेगी।

अंधविश्वास भी बड़ी चुनौती

महाराष्ट्र के ग्रामीण क्षेत्रों में सर्पदंश के बाद आज भी कई लोग अस्पताल जाने के बजाय झाड़-फूंक और पारंपरिक उपचार का सहारा लेते हैं। इससे इलाज में देरी होती है और मरीज की जान पर खतरा बढ़ जाता है।

इसके अलावा ऐसे कई मामलों का सरकारी रिकॉर्ड भी तैयार नहीं हो पाता। स्वास्थ्य विभाग के नए कदम से सर्पदंश के वास्तविक आंकड़े सामने आने और प्रभावित क्षेत्रों की पहचान करने में मदद मिलेगी।

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महाराष्ट्र सरकार का ऐतिहासिक निर्णय

सर्पदंश के मामलों का नियमित और अनिवार्य रिकॉर्ड मिलने के बाद सरकार यह पता लगा सकेगी कि राज्य के किन जिलों और क्षेत्रों में इसका प्रकोप अधिक है। इसके आधार पर जरूरत वाले स्वास्थ्य केंद्रों में ASV, आईसीयू, वेंटिलेटर और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ाई जा सकेगी।

साथ ही एंबुलेंस और मरीजों के रेफरल सिस्टम को भी अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।महाराष्ट्र सरकार का यह फैसला सर्पदंश को केवल ग्रामीण समस्या मानने के बजाय इसे गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती के रूप में देखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

हालांकि, इस व्यवस्था की सफलता के लिए अस्पतालों में पर्याप्त ASV, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी, एंबुलेंस सुविधा और ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान समान रूप से जरूरी होंगे।

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