अब हर स्कूल में गूंजेगा वंदे मातरम! राष्ट्रीय गीत के 150वीं वर्षगांठ पर महाराष्ट्र सरकार का फैसला
Maharashtra News: वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर महाराष्ट्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब राज्य के सभी स्कूलों में ‘वंदे मातरम’ का संपूर्ण गायन अनिवार्य होगा। यह अभियान 7 नवंबर तक चलेगा।
- Written By: आकाश मसने
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (सोर्स: सोशल मीडिया)
Vande Mataram Singing In Maharashtra Schools : राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के सभी स्कूलों के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। जानकारी के मुताबिक, राज्य के सभी विद्यालयों में अब ‘वंदे मातरम’ के संपूर्ण स्वरूप में गायन अनिवार्य होगा।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महायुति सरकार ने यह फैसला तब लिया है जब देश में बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित और संविधान सभा द्वारा राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिए गए ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे हो चुके हैं।
शिक्षा विभाग को आदेश
महाराष्ट्र सरकार ने शिक्षा विभाग को आदेश भेज दिया गया है। शासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह अभियान 7 नवंबर तक राज्यभर के सभी विद्यालयों में चलाया जाएगा। इस दौरान वंदे मातरम के संपूर्ण गायन के साथ-साथ स्कूलों में प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी। सभी शैक्षणिक संस्थानों को आदेश का पालन करने का निर्देश दिया गया है।
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हालांकि, इस अनिवार्यता की अवधि को लेकर शुरुआती सीमा तय की गई है। शुरू में स्कूलों में संपूर्ण गायन केवल 7 दिनों के लिए अनिवार्य किया गया है। 7 दिनों की अवधि पूरी होने के बाद, सरकार इस पर फैसला करेगी कि इस अनिवार्यता को आगे जारी रखना है या नहीं।
कुछ दलों ने किया था विरोध
इस सरकारी आदेश के बाद अब कुछ सियासी दलों की प्रतिक्रिया पर भी सबकी नजरें टिकी हैं। पहले भी कुछ राजनीतिक दलों ने सम्पूर्ण वंदे मातरम गाने का विरोध किया था। उन दलों का मानना था कि वे सिर्फ पहले 2 पद (स्तंभ) गाने पर सहमत रहेंगे। अब देखना होगा कि समाजवादी पार्टी और असदुद्दीन ओवैसी की आईएमआईएम जैसी पार्टियां, सरकार के इस नए आदेश पर क्या स्टैंड लेती हैं।
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1875 में की थी वंदे मातरम की रचना
वंदे मातरम की रचना बंकिम चंद्र चटर्जी ने 1875 में की थी। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह गीत राष्ट्रीय नारा बन गया। 1905 में बंगाल विभाजन के खिलाफ हुए आंदोलन में वंदे मातरम को नारे के तौर पर इस्तेमाल किया गया। स्वदेशी आंदोलन के दौरान अंग्रेजों के विरोध में वंदे मातरम गाया गया।
राष्ट्रीय भावनाओं को जगाने वाले इस गीत से अंग्रेज इतने नाराज हुए कि उन्होंने वंदे मातरम गायन को राजद्रोह माना और इस पर प्रतिबंध लगा दिया। गांधीजी वंदे मातरम को राष्ट्रीय एकता का प्रतीक मानते थे। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने वंदे मातरम को आजाद हिंद फौज का राष्ट्रगान बनाया। 1947 में वंदे मातरम को राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया गया।
