मुंबई-पुणे और पिंपरी में 2011 से पहले के मकान होंगे वैध, महायुति सरकार का बड़ा फैसला, बनी 10 सदस्यीय समिति

Mumbai Housing Project : महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई, पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ में 1 जनवरी 2011 से पहले बने अनधिकृत मकानों को वैध करने का निर्णय लिया है। इसके लिए 10 सदस्यीय समिति का गठन किया गया है।
Pre-2011 houses in Mumbai, Pune, and Pimpri to be legalized: Major decision by Mahayuti government
अनधिकृत मकान वैधता, प्रतीकात्मक तस्वीरसोर्स- सोशल मीडिया
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Maharashtra Government Regularises Pre: महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई, पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ के नागरिकों के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। इन महानगरपालिका क्षेत्रों में सरकारी जमीनों पर 1 जनवरी 2011 से पहले बने अवैध आवासीय मकानों को अब कानूनी मान्यता दी जाएगी।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देशों के बाद, राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने प्रक्रिया को अमलीजामा पहनाने के लिए 10 वरिष्ठ अधिकारियों की एक विशेष समिति का गठन किया है। इस नीति से उन लाखों परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी, जो दशकों से सरकारी जमीनों पर अनधिकृत बस्तियों में निवास कर रहे हैं।

बता दें कि सरकार ने मूल रूप से 25 मार्च 2026 को पूरे महाराष्ट्र राज्य में वर्ष 2011 से पहले के अतिक्रमणों को नियमित करने का प्रावधान लागू किया था। हालांकि, उस समय तकनीकी कारणों से मुंबई, पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ को इस दायरे से बाहर रखा गया था। इन महानगरों में राज्य तथा केंद्र सरकार की जमीनों पर बड़े पैमाने पर बस्तियां बसी हुई हैं।

इस स्थिति को सुलझाने के लिए सरकार ने 24 सितंबर 2026 को इन तीनों प्रमुख शहरों के वास्ते एक स्वतंत्र और सुदृढ़ नीति का औपचारिक आदेश जारी किया है। इस विशेष समिति की कमान कोकण विभाग के विभागीय आयुक्त को सौंपी गई है। समिति में मुंबई शहर, मुंबई उपनगर और पुणे शहर के जिलाधिकारी के साथ साथ बीएमसी, पीएमसी, पीसीएमसी, एसआरए और भूमि अभिलेख विभाग के प्रमुख अधिकारियों को शामिल किया गया है।

समिति की मुख्य जिम्मेदारियां और कार्यप्रणाली तय हुईं

नियोजित समिति 'म्हाडा' और 'एसआरए' के वर्तमान नियमों का सूक्ष्म अध्ययन करेगी। इसके आधार पर एक ऐसी सरल और व्यावहारिक योजना तैयार की जाएगी जो सभी के लिए लाभकारी हो।

इसके अलावा, केंद्र सरकार की जमीनों पर बने मकानों को वैध करने हेतु विशेष दिशा-निर्देश और सुझाव भी प्रस्तुत किए जाएंगे। समिति को अपनी विस्तृत रिपोर्ट आगामी 3 महीने के भीतर राज्य सरकार को सौंपनी होगी।

4,194 एकड़ जमीन, झुग्गी-झोपड़ियों में रहती है आधी आबादी

बीएमसी के आंकड़ों के अनुसार, बृहन्मुंबई क्षेत्र (मुंबई शहर और उपनगर) में कुल 2,23,150 झोपड़ियां मौजूद हैं। इनमें से 39,111 झोपड़ियां 14 फीट या उससे अधिक ऊंचाई वाली है, जिनका संबंध पूर्व में चलाए गए ऊंचाई-आधारित तोड़फोड़ अभियानों से रहा है।

अन्य सरकारी रिपोटों के मुताबिक, केवल मुंबई उपनगर जिले में ही लगभग 4, 194 एकड़ सरकारी ( राज्य और केंद्र) जमीन पर बस्तियां और कच्चे पक्के मकान बने हुए हैं। स्लम रिहेबिलिटेशन अथॉरिटी (एसआरए) की रिपोर्ट बताती है कि मुंबई के कुल भूभाग के करीब 24 प्रतिशत हिस्से पर झुग्गी-बस्तियां फैली है, जहां शहर की 50 प्रतिशत से अधिक आबादी निवास करती है।

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राज्य सरकार के फैसले से आम जनता को मिलने वाले लाभ

  • मालिकाना हकः दशकों से सरकारी जमीन पर जीवन गुजार रहे परिवारों को जमीन का मालिकाना हक या वैध पट्टा मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा।

  • आर्थिक सहायता: इन मकानों पर आसानी से बैंक लोन मिल सकेगा और संपतियों की कानूनी रूप से खरीद-फरोख्त संभव हो सकेगी।

  • सुरक्षाः अनधिकृत बेदखली और तोड़फोड़ की कार्रवाई का स्थायी रूप से भय कम होगा।

  • स्थानीय राजस्व वृद्धिः स्थानीय निकायों के संपति कर के दायरे में नई आवासीय इकाइयां आने से सरकारी राजस्व में बढ़ोतरी होगी।

  • पुनर्वसन में स्पष्टताः झुग्गी पुनर्वसन योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और तेजी आएगी।

  • पात्रता तिथि: केवल 1 जनवरी 2011 से पहले बने मकान ही वैध होंगे।

  • क्षेत्र का दायराः मुंबई शहर, मुंबई उपनगर, पुणे और पिंपरी-चिंचवड,

  • भूमि का प्रकार: राज्य और केंद्र सरकार दोनों के स्वामित्व वाली जमीनें।

  • समिति की समयावधिः 3 महीने के भीतर रिपोर्ट सरकार को सौंपना अनिवार्य है।

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