NA प्रक्रिया में नहीं काटने होंगे चक्कर! डिजिटल होगा काम, CREDAI की मांगों के आगे झुकी सरकार
Chandrashekhar Bawankule CREDAI: महाराष्ट्र के बिल्डर्स को बड़ी राहत! उत्खनन रॉयल्टी माफ और NA प्रक्रिया होगी डिजिटल। 49 साल की लीज पर मिलेगी सरकारी जमीन। बावनकुले ने मानी क्रेडाई की मांगें।
- Written By: प्रिया जैस
चंद्रशेखर बावनकुले (सौजन्य-सोशल मीडिया)
CREDAI Maharashtra: महाराष्ट्र के निर्माण क्षेत्र (रियल एस्टेट) को गति देने और प्रशासनिक जटिलताओं को कम करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने कई क्रांतिकारी निर्णय लिए हैं। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने क्रेडाई (सीआरईडीएआई) के प्रतिनिधियों के साथ मंत्रालय में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में निर्माण व्यवसायियों की लंबे समय से लंबित मांगों को मंजूरी दे दी है।
सरकार के इन कदमों से न केवल परियोजनाओं की लागत कम होगी बल्कि काम में पारदर्शिता और गति भी आएगी। बैठक में लिया गया सबसे महत्वपूर्ण निर्णय निर्माण के दौरान होने वाले उत्खनन से जुड़ा है। अब तक निर्माण कार्य के लिए नींव खोदते समय निकलने वाले गौण खनिजों पर भारी रॉयल्टी देनी पड़ती थी।
बावनकुले ने मानी CREDAI की मांगें
राजस्व मंत्री ने स्पष्ट किया है कि यदि खुदाई के दौरान निकलने वाले गौण खनिज का उपयोग उसी निर्माण स्थल (साइट) पर किया जाता है तो उस पर कोई रॉयल्टी नहीं ली जाएगी। इसके साथ ही रॉयल्टी भुगतान की प्रक्रिया को और अधिक सरल बनाते हुए इसे 6 महीने की अवधि के लिए लागू करने का निर्णय लिया गया है, जिससे विकासकों को वित्तीय राहत मिलेगी।
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पंजीकरण और त्वरित अमल
क्रेडाई की एक प्रमुख मांग को स्वीकार करते हुए मंत्री ने निर्देश दिए हैं कि किसी भी दस्तावेज के पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) के तुरंत बाद उसकी प्रविष्टि प्रॉपर्टी कार्ड (मिलकत पत्रिका) पर अनिवार्य रूप से होनी चाहिए। इन सभी तकनीकी और प्रशासनिक सुधारों को धरातल पर उतारने के लिए मुंबई नगर निगम की आयुक्त अश्विनी भिड़े और जमाबंदी आयुक्त रवींद्र बिनवडे के साथ विशेष बैठकों का आयोजन किया गया है। क्रेडाई ने सरकार के इन फैसलों का स्वागत करते हुए विश्वास जताया है कि इससे राज्य के रियल एस्टेट क्षेत्र में नई ऊर्जा का संचार होगा।’
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सरकारी जमीनों को 49 साल की लीज
राज्य सरकार ने सरकारी जमीनों के इस्तेमाल को लेकर एक नई नीति को स्वीकृति दी है। विभिन्न प्रशासनिक विभागों की जमीनों को अब 49 साल के लिए लीज पर दिया जाएगा। इस संबंध में राजस्व व वन विभाग की ओर से सर्कुलर जारी कर दिया गया है। नये नियमानुसार लीज का समय 49 साल होगा और शर्तों का उल्लंघन न होने पर इसे फिर से उतने ही समय के लिए बढ़ाया जा सकता है। जिलाधिकारी कार्यालय यह कंट्रोल करेगा कि जमीन का किराया समय पर लिया जा रहा है या नहीं।
