राज ठाकरे के नाम पर फंसी आघाड़ी की गाड़ी, चुनाव आयोग से मिलन पर विपक्ष में मचा घमासान
Mumbai News: महाविकास आघाड़ी में चुनाव आयोग से मिलने को लेकर मतभेद तेज हो गए हैं। राज ठाकरे के नाम पर विपक्षी दलों में गफलत है। आज की बैठक में तय होगा कि कौन सा नेता आयोग से मुलाकात करेगा।
- Written By: सोनाली चावरे
महाविकास आघाड़ी (pic credit; social media)
Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। महाविकास आघाड़ी (MVA) के भीतर अब चुनाव आयोग से मुलाकात को लेकर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। मंगलवार को विपक्षी दलों का एक शिष्टमंडल राज्य निर्वाचन आयोग से मिलने वाला है ताकि निकाय चुनाव पारदर्शी और निष्पक्ष हों। लेकिन इस मुलाकात से पहले ही राज ठाकरे के नाम पर विपक्ष में गफलत मच गई है।
दरअसल, विपक्षी दलों के बीच यह तय नहीं हो पा रहा है कि इस प्रतिनिधिमंडल में कौन नेता शामिल होंगे। शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) और मनसे के शामिल होने की बात तो लगभग तय है, मगर कांग्रेस और एनसीपी (शरद पवार गुट) अब तक स्पष्ट नहीं कर पाए हैं कि उनका प्रतिनिधि कौन होगा।
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल के सहयोगियों ने शामिल होने की हामी भर दी है, लेकिन पार्टी के पुराने नेताओं को इसकी कोई जानकारी नहीं। यही हाल एनसीपी (शरद पवार गुट) का भी है। वरिष्ठ नेताओं ने माना है कि उन्हें भी इस मीटिंग को लेकर कोई स्पष्ट निर्देश नहीं मिला है।
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इस बीच शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राऊत ने घोषणा की थी कि विपक्ष का प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को राज्य निर्वाचन आयुक्त दिनेश वाघमारे और मुख्य चुनाव अधिकारी चोकलिंगम से मुलाकात करेगा। बताया जा रहा है कि इस मुलाकात में शरद पवार, उद्धव ठाकरे, हर्षवर्धन सपकाल और राज ठाकरे भी शामिल हो सकते हैं।
हालांकि सत्ता पक्ष यानी भाजपा-शिंदे गुट इस बैठक से दूरी बनाए रखेगा। विपक्षी दलों का कहना है कि इस मुलाकात का मकसद निकाय चुनावों में पारदर्शिता लाना और “बोट चोर” व “गद्दी छोड़ो” जैसे नारों के बीच जनविश्वास बहाल करना है।
आज सोमवार को महाविकास आघाड़ी की अहम बैठक होने जा रही है जिसमें यह तय किया जाएगा कि मंगलवार को आयोग से मिलने कौन-कौन नेता जाएंगे।
राज ठाकरे का नाम सामने आने के बाद स्थिति और दिलचस्प हो गई है क्योंकि उद्धव और पवार गुट के नेताओं में इस पर मतभेद साफ नजर आ रहे हैं।
राजनीतिक गलियारों में अब सवाल गूंज रहा है, क्या विपक्ष की एकता सिर्फ मंच तक सीमित रह जाएगी या सच में निकाय चुनावों से पहले कोई बड़ा मोड़ देखने को मिलेगा?
