महाराष्ट्र में मिड-डे मील योजना पर संकट, एलपीजी सिलेंडर आपूर्ति रुकने की आशंका
Mid Day Meal: महाराष्ट्र में पीएम पोषण योजना के तहत स्कूली बच्चों के लिए बनने वाले भोजन पर एलपीजी सिलेंडर की कमी का संकट मंडरा रहा है। शिक्षा विभाग ने गैस आपूर्ति को प्राथमिकता देने की अपील की है।
- Written By: अपूर्वा नायक
मिड डे मील स्कीम (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Maharashtra PM Poshan Midday Meal: महाराष्ट्र में पीएम पोषण (मिड-डे मील) योजना के तहत स्कूली बच्चों के लिए भोजन तैयार करने पर एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति में बाधा आने की आशंका जताई गई है।
इसको लेकर राज्य के प्राथमिक शिक्षा निदेशालय ने भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) को पत्र लिखकर योजना के लिए एलपीजी की आपूर्ति को प्राथमिकता देने का अनुरोध किया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, निदेशालय का कहना है कि राज्य में मिड-डे मील तैयार करने का काम करने वाले कई स्वयं सहायता समूहों ने सूचना दी है कि उन्हें गैस सिलेंडर की आपूर्ति बंद कर दी गई है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि यह स्थिति जारी रही तो इससे पीएम पोषण योजना के संचालन पर असर पड़ सकता है, जिसके तहत राज्य भर में लाखों छात्रों को प्रतिदिन भोजन उपलब्ध कराया जाता है।
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राज्य के प्राथमिक शिक्षा निदेशक शरद गोसावी ने बताया कि योजना के तहत भोजन तैयार करने वाली केंद्रीय रसोइयों और स्कूलों को हर महीने लगभग 1।60 से 1।70 लाख एलपीजी सिलेंडरों की आवश्यकता होती है।
पत्र में कहा गया है कि मौजूदा समय में वैश्विक स्तर पर बनी युद्ध जैसी परिस्थितियों के कारण राज्य में काम कर रहे स्वयं सहायता समूहों, अन्य संगठनों और नगर निगमों ने जानकारी दी है कि हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत गैस ने 10 मार्च से उन्हें एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति रोक दी है।
पौष्टिक भोजन से वंचित रह सकते हैं विद्यार्थी
निदेशालय ने चेतावनी दी है कि यदि एलपीजी की कमी बनी रहती है तो योजना के तहत भोजन तैयार करने का काम प्रभावित हो सकता है और इससे छात्रों के पौष्टिक भोजन से वंचित रहने की आशंका पैदा हो सकती है।
इसी कारण तेल कंपनियों से अनुरोध किया गया है कि वे स्कूलों और केंद्रीय रसोईघरों में भोजन तैयार करने वाले समूहों और संगठनों को एलपीजी की आपूर्ति को प्राथमिकता दें। पीएम पोषण योजना के तहत सरकारी स्कूलों में कक्षा 1 से 8 तक के छात्रों को मिड-डे मील उपलब्ध कराया जाता है।
शहरी क्षेत्रों में यह भोजन आमतौर पर एनजीओ या स्वयं सहायता समूहों द्वारा संचालित केंद्रीय रसोईघरों में तैयार कर कई स्कूलों तक पहुंचाया जाता है, जबकि ग्रामीण इलाकों में अधिकांश स्कूलों में भोजन स्कूल परिसर में ही पकाया जाता है।
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निदेशालय के आंकड़ों के अनुसार राज्य में इस योजना के तहत 86,210 स्कूलों के लगभग 95 लाख छात्रों को हर दिन भोजन दिया जाता है। इनमें से 85, 159 स्कूल योजना के दायरे में आते हैं और 75,551 स्कूलों में भोजन पकाने के लिए एलपीजी का इस्तेमाल किया जाता है।
